किसानों के समर्थन में मिट्टी सत्याग्रह

 

मनोज टंडन
नई दिल्ली 3 मार्च। महात्मा गांधी ने मुट्ठी भर नमक उठा कर ब्रिटिश साम्राज्य की ताक़त को चुनौती दी और उन्होंने लाखों भारतीयों के दिलों को भय से मुक्त करके साहस पैदा कर दिया था, जिससे लाखों लोग ब्रिटिश सरकार के काले कानूनों के खिलाफ एकजुट हो गए थे।उसी तरह एक मुट्ठी भर मिट्टी भी उसी ताकत का प्रतीक है। किसानों के संघर्षों का समर्थन करने और अन्याय पूर्ण कानून को रद्द करने की उनकी मांगों के लिए प्रतिबद्ध विभिन्न लोगों के संगठनों का मिट्टी सत्याग्रह यात्रा एक राष्ट्रीय सामूहिक प्रयास है।
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान डॉ सयदा हमीद और शबनम हाशमी ने पत्रकारों को जानकारी देते हुए बताया कि 6अप्रेल‌ को दिल्ली की सीमाओं पर जगह जगह से लाई गई मिट्टी सौंपी जाएगी।
दिल्ली में 11मूर्ति, गांधी स्मृति। ,बोट क्लब, जंतर-मंतर, संसद मार्ग थाना, शहीदी पार्क, खूनी दरवाजा, बाटला हाउस, जामिया मिल्लिया इस्लामिया जैसी जगहों से मिट्टी को एकत्र किया गया है। वहीं पूरे भारतवर्ष के दूरदराज हिस्सों से भी मिट्टी को लाकर किसान आन्दोलन में जो 350किसान शहीद हुए हैं उनकी याद में जहां जहां किसान आन्दोलन कर रहे हैं वहां शहीद स्मारक बनाएं जाएंगे। इस मिट्टी में गुजरात के 800गांवो की मिट्टी भी शामिल है। हालांकि गुजरात में आंदोलनकारियों को रोकने की पुलिस ने काफी कोशिश की थी। लेकिन फिर भी वह लोग वहां से मिट्टी लाने में सफल रहे।