कोरोना महामारी में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी वीरान होता रहा और हम तमाशा देखते रहेः

  नजरे आलम पटना- कोरोना महामारी में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी वीरान होता रहा और किसी का इस जानिब ध्यान तक नहीं गया। जबकि यहाँ से पढ़ाई हासिल करने वाले लोग पूरी दुनिया में बड़े बड़े ओहदे पर अपनी खिदमात अंजाम दे रहे हैं। खैर इनकी छोड़ें जो लोग इस यूनिवर्सिटी के नाम पर तंजीम (संगठन) बनाकर चंदा बटोर रहे हैं और साल में एक बार सर सैयद डे मनाकर खुदको अलीग होने पर फख्र महसूस करते हैं वो भी इस जानिब ध्यान नहीं दिए। अफसोसनाक! यही वो यूनिवर्सिटी है जिसके नाम पर कितनों की राजनीति दुकानें चल रही हैं। लेकिन शायद ऐसे लोगों ने तारीख को जेहन से हटा दिया या फिर पूरी तरह से भुला दिया है कि इस यूनिवर्सिटी को कायम करने के लिए सर सैयद अहमद खान ने कितनी कुर्बानियां दी थीं। मुल्क के हालात को जब देखता हूँ तो यकीन नहीं होता के सर सैयद साहब कितनी आला सोच के मालिक थे जिन्होंने हमारी आने वाली नस्ल के मुस्तकबिल को जेहन में रखते इस यूनिवर्सिटी को कायम किया। यकीनन उनकी कोशिश और कुर्बानियों को फरामोश नहीं किया जा सकता। उन्होंने मुल्क के नौजवानों विशेष रूप से मुस्लिम समुदाय के नौजवानों के लिए जो ये शिक्षण संस्थान कायम किया ये अभी के वक्त के लिए बहुत बड़ा सरमाया है और इसे बचाए रखना, इसकी बेहतरी को आगे बढ़ाना और यूनिवर्सिटी से जुड़े स्टाफ, प्रोफेसर्स के साथ दरपेश मसायल के हल के लिए न सिर्फ सरकार और एडमिनिस्ट्रेशन को आगे आने की जरूरत है बल्कि देश का हर नागरिक विशेष रूप से मुस्लिम समुदाय की असल जिम्मेदारी है। हमारा संगठन ऑल इंडिया मुस्लिम बेदारी कारवाँ इस महामारी की जद में आकर यूनिवर्सिटी से जुड़े प्रोफेसर्स और स्टाफ के बड़ी तादाद में गुजर जाने पर गहरे दुख का इजहार करता है और मृतकों के परिजनों के गम में खुदको बराबर का शरीक समझता है। एक प्रेस ब्यान जारी करते हुए ऑल इंडिया मुस्लिम बेदारी कारवाँ के अध्यक्ष नजरे आलम ने उत्तर प्रदेश और केंद्र की सरकार से मांग करते हुए कहा के अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के लगभग 44 लोगों की मृत्यु कोरोना महामारी के बीच हो चुकी है आगे ये आंकड़ा न बढ़े अविलंब उच्च स्तरीय जांच करवाकर वहाँ फैले वायरस पर काबू पाया जाए और यूनिवर्सिटी के साथ साथ बचे हुए सारे स्टाफ की देखभाल और समुचित इलाज की व्ववस्था कराई जाए। नजरे आलम ने यूनियन के नेताओं और बिरयानी मास्टर से अपील करते हुए कहा कि यूनिवर्सिटी है तो हम सब हैं। इसे बचा लीजिए, बचे हुए स्टाफ के लिए आगे आइए। हमारे बड़े बड़े योद्धा प्रोफेसर्स और स्टाफ नजर के सामने सही इलाज और देखभाल नहीं होने के कारण हमें छोड़ कर चले गए और हम कुछ न कर सके। क्या सर सैयद साहब की रूह को सुकून मिल रह होगा? क्या इसी दिन के लिए उन्होंने ये कुर्बानी दी थी और हमारे बच्चों के मुस्तकबिल के लिए उन्होंने ये यूनिवर्सिटी कायम की थी। हमारे प्रोफेसर्स और स्टाफ मरते रहें और हम तमाशा देखते रहें। आगे आइए सरकार और प्रशासन से मिलिए और आगे और किसी की जान न जाए इसके लिए ठोस इकदाम उठाइए।