मुल्क में फ़ैल रही है मुस्लिम तबके से मजहबी आधार पर नफ़रत

मनोज टंडन नई दिल्ली 28मई ।मुल्क कोरोनावायरस जैसी वबा से जूझ रहा है, लेकिन इसके साथ साथ एक और खतरनाक बीमारी पिछले कुछ सालों से मुल्क में फ़ैल रही है और वो है मुस्लिम तबके से मजहबी आधार पर नफ़रत करने की।आलम यह है कि घर पर रहो तो अख़लाक़, मस्जिद जाओ तो मोहसिन, मदरसा जाओ तो अज़ीम, ट्रेन से जाओ तो जुनैद, यूनिवर्सिटी जाओ तो नजीब, बाहर कमाने जाओ तो अफराजुल, आजीविका के लिए निकलो तो पहलू खान, और महामारी में घर से सामान लेने निकलो तो आसिफ, सब्जी बेचने निकलो तो फैसल बना देते हैं? मुल्क की रियासत दिल्ली के स्वरूप नगर इलाके में ही सरफराज नामक नौजवान को लैटंर डालने वाली मशीन से बांध कर पीट पीट कर मार डाला।वो भी चोरी के शक में। उसने किसी के घर में चोरी नहीं की थी, बावजूद इसके भी उसे बुरी तरह से पीट पीट कर मार डाला गया। अगर वो कसूर वार था तो उसे पुलिस के हवाले करना चाहिए था? उसे सज़ा देने का हक लोगों को किसने दिया। आखिरकिस दिशा मे लोग आगे बढ़ रहे है? आखिर कब तक ये सब देखते रहेंगे बेकसूर लोग, ना शासन साथ देता है ना प्रसासन। ऐसे अपराध करने के बाद कुछ फिरका परस्त संगठन फूल और माला पहना कर ऐसे लोगों की हौसला अफजाई करते है । लगता है किएक ही देश दो तरह के कानून है अल्पसंख्यक के लिए अलग और दूसरे धर्म के लिए अलग। अगर कोई अल्पसंख्यक ब्यक्ति अपनी पीड़ा कह दे तो देशद्रोह ,और कोई दूसरे धर्म से दंगा भड़का दे या मारने के धमकी दे तो उसे पार्षद,विधायक या सांसद का टिकट आखिर ऐसा क्यू ?एक ही देश मे यह कैसा इंसाफ? जो सरकार मे है उसके लिए सब माफ़ जो विपक्ष मे है उसके खिलाफ देशद्रोह! कोरोना काल की इस संकट घड़ी में शासन प्रशासन की पोल खुल गई है। इंसानियत को शर्मसार करने वाले नजारे अस्पतालों के बाहर नज़र आएं। ऑक्सीजन की कमी से लोगों ने अस्पतालों में दम तोड़ दिया।हो सकता था कि कोविड 19 के इलाज से वो ठीक हो जाते लेकिन ऑक्सीजन की कमी ने उन्हें असमय मौत के मुंह में पहुंचा दिया? आखिर इन लोगों की मौत का जिम्मेदार कौन है? उसपर सितम यह कि मरने के बाद अंतिम संस्कार तक लोगों को नसीब नहीं हुआ। देशवासी ना केवल कोरोनावायरस से लड़ रहे हैं बल्कि नफ़रत की सियासत से भी जूझ रहे हैं।कोरोना के साथ साथ इस फिरका परस्ती को भी इस देश से भगाना होगा।