अनलॉक में कोरोना गाईडलाइन को नज़र अंदाज करना उचित नहीं : मौलाना आबिद क़ासमी

लॉकडाउन की तर्ज पर हो भविष्य में होने वाली शादियों पर खर्च : डॉ० मुश्ताक अंसारी

 

 

मनोज टंडन
पूर्वी दिल्ली 29 मई। जमियत उलेमा-ए-हिन्द पूर्वी दिल्ली जिले की एक अहम बैठक ब्रिजपुरी इलाके में आयोजित की गई, जिसमें जमियत के प्रदेश अध्यक्ष मौलाना आबिद क़ासमी मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। इसके अलावा ज़िले के पदाधिकारी ज़िला अध्यक्ष मौलवी ज़ाहिद कासमी, जनरल सैकेटरी डॉ० मुश्ताक अंसारी, खंजाची मौ० इलयास सैफी, उपाध्यक्ष डॉ० अनजारूल हक, डॉ० कमरूल हक, खुर्शीद अंसारी, चौ० मौ० इनाम, डॉक्टर इमरान अंसारी, मोहम्मद ख़लिक़, मौ० यूसुफ, हसरूद्दीन आदि ने भी बैठक में शिरकत की। बैठक में जमीयत के राष्ट्रीय अध्यक्ष मरहूम मौलाना मोहम्मद उस्मान मंसूरपुरी की मग़फ़िरत के लिए दुआ की गई और उनकी जीवनशैली पर चर्चा करते हुए उनके व्यक्तित्व से प्रेरणा लेने पर ज़ोर दिया गया !
इस मौके पर मौलाना आबिद कासमी ने दिल्ली के वर्तमान हालात पर अपने विचार प्रकट करते हुए कहा कि सरकार ने जो लॉकडान को खोलने का ऐलान किया है,जमियत उसका स्वागत करती है और साथ ही हम आवाम से अपील करते हैं कि अनलॉक में कोविड़ की सरकारी गाईडलाइन को हरगिज नज़र अंदाज न करें और बिना खास जरूरत के घर से बाहर न निकलें। उन्हेांने कहा कोरोना नामक यह भयानक बीमारी अभी खत्म नही हुई है और इसकी तीसरी लहर की खबरें भी सुनने को मिल रही हैं जिसमें बच्चों के प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। तो ऐसी स्थिति में जागरूकता के साथ अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है।
ज़िला अध्यक्ष मौलाना जाहिद कासमी ने कहा कि देश व समाज पर जब भी कोई प्राकृतिक संकट आया है तो जमियत ने आगे बढ़कर बिना किसी भेदभाव के सभी धर्म के मानने वालों की मदद की है। लॉकडान में जमियत ने खास तौर से हमने अपने जिले में जरूरतमंदों को राशन व स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई हैं और अनलॉक होने के बाद भी मदद का सिलसिला जमियत जारी रखेगी।
ज़िला जनरल सैक्टरी डॉ० मुश्ताक अंसारी ने अपने ख्यालात जाहिर करते हुए कहा कि कोरोना से बचने की गरज़ से लगाए गए लॉकडाउन में एक फायदा देश व समाज का यह भी हुआ कि ब्याह शादी पर होने वाला खर्च सीमित हो गया, भले ही प्रशासन के डर से हुआ लेकिन इस्लाम की एक शरीयत ज़िंदा हुई। डॉ० अंसारी ने खास तौर से मालदार लोगों से गुजारिश करते हुए कहा कि वह शादियों पर होने वाले खर्च को हमेशा के लिए सीमित कर दें और दहेज से परहेज करें ताकि गरीब लड़कियों के निकाह भी आसानी से हो सकें। ज़िला खंजाची मौ० इलयास सैफी ने अपने वक्तव्य में कहा कि लॉकडाउन में कारोबार के साथ-साथ बच्चों की पढ़ाई का भी बहुत नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि शिक्षित लोगों की हर दौर में जरूरत पड़ती है, कोरोना से लड़ी जा रही जंग में भी वैज्ञानिकों व डॉक्टरों की शिक्षा सबसे अधिक काम में आ रही है लिहाजा बच्चों की शिक्षा का जो नुकसान पिछले 15 महीनों में हुआ है उसके प्रति भी जमियत अभिभावकों को जागरूक कर रही है। मोहम्मद इलयास ने यह भी कहा कि अभिभावक अपने कारोबार के साथ-साथ बच्चों की शिक्षा पर भी विशेष ध्यान दें।