मथुरा जेल में बंद अतिकुर्र रहमान की रिहाई के लिए उठाई आवाज

सुषमा रानी नई दिल्ली 27 अगस्त । उत्तर प्रदेश में मानव अधिकारों का जमकर उल्लंघन किया जा रहा है।आलम यह है कि हक़ की आवाज उठाने वालों को जेल में बंद कर उन्हें जेल में कैदियों को मिलने वाली सुविधाओं से महरूम किया जाता है। कुछ ऐसा ही मथुरा की जेल में बंद सहाफी अतीकुर्ररहमान के साथ किया जा रहा है। ख़राब सेहत के बावजूद भी उन्हें अस्पताल में इलाज नहीं मिल रहा है।अतीकुर्ररहमान को दिल की बीमारी है और उनके दिल में वाल्व पड़ने है । आज प्रेस क्लब में अतिकुर्ररहमान की अहिल्या संजीदा ,अतिकुर्ररहमान के मामू शेखावत अली और उनके वकील एडवोकेट मधुवन दत्त चतुर्वेदी ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सहाफियो से बातचीत में कहा कि हाथरस में दलित बेटी के बलात्कार और हत्या के बाद वो 4 अक्टूबर को हाथरस जा रहें थे। उसी दौरान उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था।बाद में उनपर उत्तर प्रदेश पुलिस ने दंगे की साज़िश रचने समेत कई अन्य धाराएं लगा दी थी। अतिकुर्ररहमान की अहिल्या संजीदा ने बताया कि अतीकुर्ररहमान को दिल की बीमारी है। उन्हें एम्स में इलाज के लिए भर्ती कराया जाना चाहिए। लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार ना तो उन्हें उचित इलाज दे पा रही है और ना ही इस मनघड़ंत कैस में जमानत मिल पा रही हैं। पुलिस अभी तक इस मामले में किसी तरह का कोई सबूत पेश कर पाई है। अतीकुर्ररहमान के वकील एडवोकेट मधुवन दत्त चतुर्वेदी के मुताबिक तमाम उथल-पुथल के बावजूद एक इंसान को मेडिकल ट्रीटमेंट और देखभाल से वंचित रखना और उसे मरने के लिए छोड़ देना उचित नहीं है। अदालत को उसकी मुनासिब तव्वजो के साथ उसकी दरख्वास्त पर गौर करते हुए डिफाॅल्ट जमानत देनी चाहिए।