प्राईवेट स्कूलों से सरकारी स्कूलों की तरफ छात्रों का पलायन कोविड से उत्पन्न आर्थिक तंगी और मजूबरी- चौ0 अनिल कुमार

  सुषमा रानी नई दिल्ली, 14 सितम्बर, । दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष चौ0 अनिल कुमार ने कहा कि दिल्ली सरकार निजी स्कूलों के 1.60 लाख छात्रों को सरकारी स्कूलां में दाखिला देने पर अपनी पीठ थपथपा रही है, जबकि सच्चाई यह है कि कोविड के कारण आर्थिक तंगी झेल रहे दिल्लीवासियों ने बच्चों को शिक्षा देने की बजाए जिन्दा रहने को प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा कि कोविड के कारण व्यापारिक घाटे, रोजगार जाने और अजीविका संकट से तंग अभिभावकों को राहत देने के लिए सरकार ने प्राईवेट की फीस को लेकर कोई ठोस कदम नही उठाया। ऐसी हालत में अभिभावक बंद पड़े प्राईवेट स्कूलों की फीस देने की स्थिति में नही है जिसके कारण सरकारी स्कूलों में दाखिला बढ़ोत्तरी हुई है। चौ0 अनिल कुमार ने कहा कि प्राईवेट स्कूलों के लगभग 2.4 लाख छात्रों ने दिल्ली के सरकारी स्कूलों में आवेदन किया है क्योंकि कोविड महामारी के आर्थिक संकट से जूझ रहे अभिभावक प्राईवेट स्कूलों की फीस भरने में असमर्थ है। चौ0 अनिल कुमार ने कहा कि अरविन्द सरकार के लिए शर्म की बात है कि उन्होंने अभिभावकों को कोविड महामारी से राहत देने के लिए दिल्ली के प्राईवेट स्कूलों को फीस में छूट देने के लिए कोई कार्यवाही नही की जबकि कोविड में अधिकांश लोगों को जीवन जीने के लिए संघर्ष करना पड़ा और अपने बच्चों की शिक्षा पर गौर करने जगह उन्होंने अपने को जिंदा रखने को प्राथमिकता देनी पड़ी। चौ0 अनिल कुमार ने कहा कि दिल्ली सरकार शिक्षा निदेशालय का बयान की दिल्ली सरकार के स्कूलों में 2.40 लाख छात्रों ने आवेदन किया जिसमें 1.60 लाख छात्रों को दाखिला दे दिया गया है। चौ0 अनिल कुमार ने कहा सवाल उठाते हुए कहा कि दिल्ली के सरकारी स्कूलों में इन्फ्रास्ट्रक्चर की भारी कमी है। क्या दिल्ली सरकार टीचरों की भारी कमी के चलते इतनी बड़ी संख्या में बढ़ोत्तरी हुए छात्रों को उत्तम शिक्षा मुहैया करा पाऐगी। चौ0 अनिल कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल द्वारा प्राईवेट स्कूलों को फीस वसूलने की खुली छूट का ही नतीजा है कि बड़ी संख्या में छात्रों को प्राईवेट स्कूल छोड़ने पड़े है। चौ0 अनिल कुमार ने मांग की प्राईवेट स्कूलों में पढ़ने वाले कोविड से आर्थिक संकट से प्रभावित परिवारों के बच्चों की फीस दिल्ली सरकार वहन करें और कोविड से आर्थिक रुप से प्रभावित छोटे निजी स्कूलों को दिल्ली सरकार आर्थिक पैकेज दे। चौ0 अनिल कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल द्वारा दूसरे राज्यों में दिल्ली के शिक्षा मॉडल की दुहाई देना केवल खोखली बयानबाजी है क्योंकि 2014 से 2020 तक सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या का आंकलन करें तो इस दौरान सरकारी स्कूलों में 1.09 लाख छात्र कम हुए थे और निजी स्कूलों में 3.25 लाख छात्रों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई थी। उन्होंने कहा कि 2020-2021 में कोविड महामारी के समय को छोड़ दिया जाए तो कांग्रेस की दिल्ली सरकार के दौरान सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या की तुलना में केजरीवाल सरकार के कार्यकाल में स्कूलों में छात्रों की संख्या में लगातार कमी आई है। उन्होंने कहा कि प्राईवेट स्कूलों के छात्रों को कोविड काल के बाद आर्थिक संकट के कारण मजबूरन सरकारी स्कूलां में दाखिला लेना पड़ा है न कि दिल्ली सरकार के बेहतर शिक्षा मॉडल की वजह से चौ0 अनिल कुमार ने कहा कि अरविन्द केजरीवाल ने आपदा में अवसर तलाशते हुए हमेशा दिल्लीवासियों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करके भावनात्मक भाषण देकर उन्हें गुमराह करते है। चौ0 अनिल कुमार ने कहा कि पिछले 7 वर्षों में जब केजरीवाल सरकार ने एक भी नया स्कूल नही बनाया है केवल पुराने कमरों को नया रुप देकर शिक्षा मॉडल की बात कर रहे है, क्या इतनी अधिक संख्या में छात्रों की वृद्धि को दिल्ली के स्कूल सहने की स्थिति में है?