दिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से हस्तक्षेप कर अपनी सरकार के वित्त विभाग से नगर निगम के कांट्रैक्ट अध्यापकों का वेतन फंड जारी करने की माँग

  सुषमा रानी नई दिल्ली, 16 सितम्बर। दिल्ली भाजपा अध्यक्ष श्री आदेश गुप्ता ने कहा है कि दिल्ली सरकार शिक्षा व्यवस्था में सुधार के बड़े-बड़े दावे करती है पर सच यह है कि न तो स्कूलों में शिक्षा का मूलभूत ढांचा सुधार पा रही है और न अपने स्कूलों में अध्यापकों की आवश्यक पूर्ति कर पा रही है न नगर निगमों को अपने स्कूलों में पूरे अध्यापक रखने दे रही है। सरकार स्कूल अध्यापकों से कोरोना काल तक में आन लाईन क्लासों में पढ़ाने के साथ ही कोरोना राहत बंटवाने का काम भी करवाती रही है पर ना अपने स्कूलों के हज़ारों गेस्ट टीचर्स को काम एवं वेतन दे रही हैं और ना ही उत्तरी दिल्ली नगर निगम को उसके 667 कांट्रैक्ट अध्यापकों का वेतन फंड गत मई 2020 से दे रही है। सरकार द्वारा कांट्रैक्ट अध्यापकों को न रखने देने का नतीज़ा है कि निगम स्कूलों में इस वर्ष हुई नई छात्र भर्ती के बाद अध्यापक-छात्र अनुपात 1 : 45 से अधिक हो गया है जो अनुचित है। मई 2020 से पहले जब तक कांट्रैक्ट अध्यापक काम कर रहे थे तब निगम स्कूलों का अध्यापक-छात्र अनुपात 1 : 40 था जो एक आदर्श अनुपात था पर दिल्ली सरकार द्वारा उनका वेतन फंड रोक देने से स्थिती खराब हो गई है। श्री आदेश गुप्ता ने कहा कि दिल्ली नगर निगमों में शिक्षकों का वेतन फंड केन्द्र सरकार से राज्य सरकार को सर्व शिक्षा अभियान के तहत मिलता है जो वह नगर निगमों को भी देती है पर गत डेढ साल से दिल्ली सरकार उत्तरी नगर निगम को कांट्रैक्ट अध्यापक वेतन फंड नही दे रही है। इन कांट्रैक्ट अध्यापकों का वेतन 35420 रूपए है जिसमे से 8855 रूपए केन्द्र सरकार सीधा निगम को देती है शेष 26565 रूपए दिल्ली सरकार को देना होता है जो वह वर्तमान मे नही दे रही है। उत्तरी नगर निगम लगातार दिल्ली सरकार से यह फंड पुनः चालू करने की माँग कर रहा हैं पर सरकार नही दे रही जिससे स्कूलों का पाठ्यक्रम बिगड़ रहा है। दिल्ली भाजपा अध्यक्ष श्री आदेश गुप्ता ने आज मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से अपील की है कि यदि मुख्यमंत्री की सरकार का शिक्षा के प्रति संकल्प सच्चा है तो वह उत्तरी नगर निगम के मामले में हस्तक्षेप करें और अविलंब कांट्रैक्ट अध्यापक फंड जारी करे ताकि निगम का शिक्षा स्तर उच्च बना रह सके।