हाल के दिनों में तालीम महंगी हुई है और ग़रीबों की पहुंच से निकल रही है

हाल के दिनों में तालीम महंगी हुई है और ग़रीबों की पहुंच से निकल रही है। कोचिंग, किताब, फीस जैसे तमाम मसले हैं जिनकी वजह से बच्चे पढ़ाई में अच्छा होने के बावजूद एक हद से आगे नहीं बढ़ पाते ग़रीब बच्चे बाक़ी से सलाहियत में कम नहीं हैं लेकीन उनके पास वसाइल नहीं हैं। हमने तय किया है कि ऐसे बच्चों का अच्छे इदारों में पढ़ने का ख़्वाब पूरा हो पैसा तालीम पाने की राह में आड़े नहीं आना चाहिए। कमज़ोर से कमज़ोर घर के बच्चे में अगर सलाहियत है तो उसको भी आईआईएम, आईआईटी, एम्स जैसे इदारों में दाख़िला लेने का हक़ मिलना चाहिए। वो पैसे की वजह से अपना ख़्वाब अधूरा न छोड़े। हम उन तमाम बच्चों की मदद करेंगे जो सलाहियत रखते हैं। इसमें न उनका मज़हब शर्त है, न ज़ात, न बिरादरी और न इलाक़ायत।।। हिंदुस्तान का शहरी है, हिंदुस्तानी है और हम जैसा इंसान है, इससे बड़ी शर्त नहीं हो सकती शुरुआत 100 बच्चों से हो रही है । पहले साल नीट और जेईई के ज़रिए ज़्यादा से ज़्यादा बच्चों को आईआईटी और एम्स जैसे इदारों दाख़िला दिलाना है प्रोग्राम जैसे जैसे आगे बढ़ेगा बच्चों की तादाद बढ़ेगी और साथ ही कोशिश करेंगे कि और कोर्स के लिए भी हम इस तरह कोचिंग का इंतज़ाम कर सकें। इस प्रोग्राम में द हिंद गुरू एकेडमी हमारे साथ है इनके पास कोचिंग के तमाम वसायल हैं, कई साल का तजुर्बा है। मुल्क के बेहतरीन टीचर इस प्रोग्राम के लिए हमने साथ जोड़े हैं। तकनीक की मदद ली जा रही है। कोर्स मैटिरियल और बेहतरीन किताबों का इंतज़ाम किया है। इसके साथ हम देवबंद में भी एक कोचिंग सेंटर शुरू कर यहे हैं। वहां भी हास्टल समेत तमाम सहूलियत बच्चों को मिलेंगी। बच्चों की ज़रूरत के हिसाब से उन्हें दिल्ली या देवबंद रखा जा सकता है। आगे और भी सेंटर बढ़ाए जा सकते हैं। नतीजों और तजुर्बों के हिसाब से आगे और भी बदलाव होंगे। लेकिन एक बात कभी नहीं बदलेगी वो है हमारा मिशन। हम हर कमज़ोर के साथ हैं और सबको अच्छी तालीम दिलाने के लिए हम हर तरह की कोशिश करते रहेंगे। देवबंद में जल्द अंग्रेज़ी मीडियम सीनियर स्कूल बना रहे हैं कोचिंग सेंटर बना रहे हैं और भी कई काम हैं जो आपको वक़्त के साथ पता चलते रहेंगे