राष्ट्रीय चेतना अभियान जम्मू-कश्मीर में केन्द्र सरकार की नीतियां पूर्ण विफल

    सुषमा रानी नई दिल्ली 4 दिसम्बर।श्रीनगर के अनंतनाग में रहने वाले कुछ लोग दिल्ली में बैठक करने आए, जिसमें मोहम्मद नजीर लोन, श्री राजीव जौली, श्रीमती माला और बहुत से जम्मू-कश्मीर के निवासी उपस्थित थे। उपस्थित लोगों ने सवाल उठाए कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद पर सरकार क्यों काबू नहीं पा सकी है? क्या आतंकवादी संगठन सरकार से ज्यादा मजबूत हैं या आज की सरकार स्वयं ही आतंकवादी कार्यवाही सुनिश्चित करके लोगों कीे भ्रमित कर रही है। क्या हमारी सेनाएं, अर्धसैनिक बल व पुलिस कमजोर है कि आतंकवादियों पर नियंत्रण नहीं कर पा रही है। इसकी जिम्मेदारी हमेशा सरकारों की होती हैं। आज की सरकार की इस विषय पर पूर्णरूप से विफल है। यह स्पष्ट है कि देश आज की सरकार के हाथ में सुरक्षित नहीं है। श्रीमती माला ने कहा कि कश्मीर में पर्यटकों की संख्या कम हो रही है। पर्यटक आएंगे तभी कश्मीर में रहने वाले देश के नागरिकों का पेट भरेगा। सरकार क्यों नाकामयाब है, जबकि दुनिया की सबसे जांबाज और बड़ी सेना भारत के पास है। ऐसा लगता है कि सरकार ही आतंकवाद का मुद्दा जीवित रखना चाहती है। सरकार चाहे तो आतंकवाद जड़ से खत्म कर सकती है। यह विडंबना है कि भारतवासियों को आतंकवाद से डराकर सरकार अपनी रोटियां सेक रही है। श्री खोसला ने कहा कि सरकार को जम्मू-कश्मीर राज्य की जरूरत है, लेकिन वहां रहने वाले भारतीय नागरिकों की नहीं। 5 अगस्त, 2019 को धारा 370 को खत्म करने के बाद भी सरकार और मीडिया के अनुसार आतंकवादी गतिविधियों में कोई कमी नहीं आयी। मोदी सरकार चुनाव करवाना जरूरी नहीं समझती। हर जगह तानाशाही का बोलाबाला है।