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खाद्य आपूर्ति मंत्री इमरान हुसैन और चारों आरोपियों को HC से राहत

खाद्य आपूर्ति मंत्री इमरान हुसैन और चारों आरोपियों को HC से राहत

उत्तरी दिल्ली नगर निगम के जूनियर इंजीनियर से हाथापाई करने और सरकारी कामकाज में बाधा पहुंचाने के मामले में दिल्ली सरकार के खाद्य आपूर्ति मंत्री इमरान हुसैन व अन्य को हाईकोर्ट से राहत मिल गई है।

हाईकोर्ट ने मंत्री व अन्य के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया है। हाईकोर्ट ने बदले में बल्लीमारन से विधायक इमरान हुसैन सहित चारों आरोपियों को पचास-पचास हजार रुपये प्रधानमंत्री राहत कोष में जमा करने का आदेश दिया है। इन पर नगर निगम के जूनियर इंजीनियर को कथित तौर पर जातिसूचक आपत्तिजनक टिप्पणी कर अपमानित करने के आरोप में भी मुकदमा दर्ज किया गया था।

जस्टिस सुरैश कैट ने हाल ही में इमरान व अन्य की ओर से दाखिल याचिका पर विचार करते हुए यह फैसला दिया है। इनकी ओर से दाखिल याचिका में कहा गया था कि इस मामले में शिकायतकर्ता व नगर निगम के जूनियर इंजीनियर एम.सी. मीणा से समझौता हो गया है। ऐसे में दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज एफआई को खारिज कर दिया जाए।

इससे पहले दिल्ली पुलिस ने आप नेता व अन्य की ओर से दाखिल इन याचिका का हाईकोर्ट में कड़ा विरोध किया। पुलिस ने हाईकोर्ट में कहा कि आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया जा चुका है। साथ ही कहा कि आरोपियों पर मुकदमा चलाने के लिए आरोप तय करने का इंतजार किया जा रहा है। दिल्ली पुलिस ने यह भी कहा है कि यदि दर्ज एफआईआर को खारिज किया जाता है तो आरोपियों पर भारी जुर्माना लगाया जाना चाहिए।

 

इसके बाद हाईकोर्ट ने अप्रैल, 2003 में आप नेता इमरान व अन्य के खिलाफ पुलिस द्वारा दर्ज मुकदमा खारिज कर दिया। साथ ही अदालत ने सभी आरोपियों को दो सप्ताह के भीतर पचास-पचास हजार रुपये प्रधानमंत्री राहत कोष में जमा कराने का आदेश दिया। इस मामले में इमरान के अलावा तुर्कमान गेट के निगम पार्षद, एक पूर्व विधायक के अलावा कूचा पंडित के निगम पार्षद को भी आरोप बनाया गया था।

क्या है मामला
अप्रैल 2013 में उत्तरी दिल्ली निगक में भवन विभाग के जूनियर इंजीनियर इलाके में अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई करने गए थे। आरोप था कि आप नेता इमरान व अन्य मौके पर पहुंचकर न सिर्फ अधिकारियों के कामकाज में बाधा पहुंचाई बल्कि इंजीनियर मीणा से हथापाई व जान से मारने की धमकी भी दी। साथ ही उनके जाति के बारे में भी आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप लगाया था। इस मामले में पुलिस ने इमरान व अन्य के खिलाफ अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारक अधिनियम के अलावा आईपीसी की धारा 186/ 505/ 34 के तहत मुकदमा दर्ज किया था।

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