नई दिल्ली के जेएलएन स्टेडियम में “हुनर हाट” कल्चर क्राफ्ट और क्रिएटिविटी का संगम

मनोज टंडन नई दिल्ली, 23 दिसंबर।केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन एवं श्रम एवं रोजगार मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने आज यहाँ कहा कि “हुनर हाट”, देश के छोटे कस्बों, छोटे शहरों के हुनर की राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पहचान बन गया है। जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम, नई दिल्ली में आयोजित 35वें “हुनर हाट” के उद्घाटन के अवसर पर श्री यादव ने कहा कि भारत के हर क्षेत्र, हर समाज में हुनर बसता है। इसे प्रमोट किये जाने की जरुरत है और इस दिशा में “हुनर हाट” प्रभावी भूमिका निभा रहा है। श्री यादव ने कहा कि “हुनर हाट”, “कल्चर, क्राफ्ट और क्रिएटिविटी का संगम” है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की “प्रेरणा” और केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री श्री मुख्तार अब्बास नकवी के “प्रण” से स्वदेशी उत्पादनों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय अवसर मुहैया हुए हैं। श्री यादव ने कहा कि “हुनर हाट” से देश के कोने-कोने में बैठे हुनरमंद लोगों को मौका मिला है, उन्हें तरक्की की मुख्यधारा से जोड़ा गया है। इस अवसर पर केंद्रीय विदेश एवं संस्कृति राज्यमंत्री श्रीमती मीनाक्षी लेखी ने कहा कि “हुनर हाट”, भारतीय संस्कृति, कला को, भारत की आत्मा को नई ऊर्जा-उत्साह दे रहा है। श्रीमती लेखी ने कहा कि कोरोना की चुनौतियों के बीच भी “हुनर हाट” ने दस्तकारों, शिल्पकारों को रोजगार प्रदान किया है। “हुनर हाट” देश के हुनर को आगे बढ़ाने में मददगार साबित हुआ है। इस अवसर पर श्री नकवी ने कहा कि “हुनर हाट”, देश की स्वदेशी दस्तकारी, शिल्पकारी की विरासत के “प्रोटेक्शन, प्रिजर्वेशन, प्रमोशन का परफेक्ट प्रकल्प” है। “कौशल कुबेरों के कुम्भ”, “हुनर हाट” से दस्तकारों, शिल्पकारों, कारीगरों को काम और नाम दोनों मिल रहा है। श्री नकवी ने कहा कि “हुनर हाट” “3V”- “विश्वकर्मा विरासत के विकास” का महत्वपूर्ण माध्यम बन गया है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा देश की हुनर की विरासत को नई ऊर्जा, साथ ही मौका-मार्किट भी मुहैया कराया जा रहा है। 35वें “हुनर हाट” के उद्घाटन के अवसर पर पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सांसद डॉ. हर्षवर्धन; सांसद श्री मनोज तिवारी एवं श्री प्रवेश साहिब सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। 23 दिसंबर 2021 से 5 जनवरी 2022 तक 14 दिन तक चलने वाले इस “हुनर हाट” में देश के 30 से अधिक राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों के 700 से ज्यादा दस्तकार, शिल्पकार, कारीगर एवं पारम्परिक पकवानों के उस्ताद भाग ले रहे हैं। श्री नकवी ने कहा कि “हुनर हाट” ने पिछले लगभग 6 वर्षों के दौरान 7 लाख 50 हजार से अधिक कारीगरों, शिल्पकारों और उनसे जुड़े लोगों को रोजगार और स्व-रोजगार के अवसर प्रदान किए हैं। इनमें 40 प्रतिशत से अधिक महिलाएं हैं। जेएलएन स्टेडियम में आयोजित “हुनर हाट” में सुरक्षा, सफाई, स्वास्थ्य की पूरी सावधानी रखी गई है। “हुनर हाट” में प्रवेश मास्क के साथ अनिवार्य किया गया है। आगंतुकों को फ्री में मास्क वितरण की व्यवस्था भी की गई है। “हुनर हाट” के पूरे कैंपस में साफ सफाई बनाए रखने के लिए 350 सफाईकर्मी और सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त रखने के लिए 200 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। आयोजन स्थल के पास ही अलग से पार्किंग स्थल की व्यवस्था में 50 लोगों की टीम लगी है। विश्वकर्मा वाटिका, मेरा गांव मेरा देश, बावर्चीखाना सेक्शन में 40 लोगों की तीन टीम व्यवस्था में लगी है।       मास्क और सेनिटाइजर का विशेष ध्यान रखा गया है। सीसीटीवी कैमरे और ड्रोन कैमरे से भी लगातार निगरानी की जा रही है। कहीं भी किसी भी तरह की कोई दिक्कत-परेशानी ना हो इसका भरपूर इंतजाम किया गया है। जेएलएन स्टेडियम में आयोजित “हुनर हाट” में असम, बिहार, आंध्र प्रदेश, गुजरात, लद्दाख, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, झारखंड, नागालैंड, मेघालय, दिल्ली, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, मणिपुर, गोवा, पुडुचेर्री, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, चंडीगढ़, हरियाणा सहित 30 से अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 700 से ज्यादा दस्तकार, शिल्पकार, कारीगर शामिल हैं। ये कलाकार अपने साथ हस्तनिर्मित शानदार एवं दुर्लभ स्वदेशी उत्पाद लेकर आये हैं। वहीँ “हुनर हाट” के बावर्चीखाना में देश के विभिन्न क्षेत्रों के पारम्परिक पकवान हिंदुस्तान के हर क्षेत्र के जायके का मज़ा देगा। इस “हुनर हाट” में पंकज उधास, अल्ताफ राजा, दलेर मेहदी, सुरेश वाडेकर, सुदेश भोसले, कविता कृष्णमूर्ति, अमित कुमार, मनोज तिवारी, पवन सिंह, भूमि त्रिवेदी, मोहित खन्ना, जसवीर जस्सी, प्रिया मल्लिक, रेखा राज सहित अन्य मशहूर कलाकारों के विभिन्न सांस्कृतिक-गीत-संगीत के कार्यक्रम; प्रसिद्द अभिनेता पुनीत इस्सर, गुफी पेंटल एवं कलाकारों द्वारा ऐतिहासिक “महाभारत” धारावाहिक का मंचन; पारम्परिक सर्कस प्रमुख आकर्षण हैं। अधिकांश बड़े सांस्कृतिक कार्यक्रम 31 दिसंबर के बाद आयोजित किये जायेंगें।