गिरिराज बाबू, मेरा दिल आपने क्यों तोड़ा?

  आरिफ इक़बाल ( ये मेरे निजी विचार है) केंद्रीय मंत्री *गिरिराज सिंह* पर विपक्ष लाख ज़ुबानी हमला करे, लोग बुरा भला कहे, वेक्तिगत तौर पर मैं उनसे काफी प्रभावित था एक प्रखर वक्ता और एक ज्ञानी वयक्ति के नाते। लोग मुझे भर्मित करते कि गिरिराज सिंह हमेशा एक वर्ग को पाकिस्तान, बंगलादेश भेजने का काम करते हैं। क्यों भाई, वो विदेश मंत्री हैं क्या? क्या भारत सरकार ने उन्हें पाकिस्तान भेजने का ठेका दे रखा है। कमज़रफों, क्यों हमारे गिरिराज बाबू पर लांछन लगाते हो, मैं कहने वाले पर गुस्सा हो जाता। हमारे गिरिराज बाबू जैसे भी हैं, हमारे हैं। देशभक्त, भारत माता पर मर मिटने वाला सच्चा सपूत, गरीबों के हितों के लिए अपना सब कुछ निछावर करने वाला विकास पुरूष, कोई है क्या। मेरा बस चले भारत का अगला प्रधानमंत्री पद इनके लिए आरक्षित कर दूं। हमारे भारत की बदकिस्मती है कि अब तक यहाँ के कॉलेज, यूनिवर्सिटीज ने देशभक्ति जैसे ज्वलनशील विषय पर एक भी लेक्चर देने के लिए इन्हें आमंत्रण नही दिया है। मैं निज़ी रूप से मर्माहित हूँ कि आख़िर हमारे गिरिराज बाबू की इस विषय पर अनदेखी क्यो की जा रही है, कम से कम नर्सरी कक्षा के बच्चों के अंदर देशभक्ति का जज़्बा पैदा करने के लिए ही बुला लें। ताकि गिरिराज बाबू देश भक्ति के साथ बच्चों में देशद्रोहियों की चिन्हित कैसे हो इसके भी गुड़ सिखाएं। ये हमारा स्वभाग है कि हम इनके प्रदेश में रहते हैं, इनके जिला में पैदा न होने का अफसोस जरूर है। मगर गिरिराज बाबू, आज आपने क्या किया। आपको देखने सुनने की हसरत लिए सालों दीवानों की फिरता था। आज आप अररिया के जैन धर्मशाला में पकड़ाये। आपको सामने पाकर सुखमय हो गया। वर्षों से आपको देखना सुनना चाहता था ताकि उनलोगों की मुंह बंद कर दूं जो आपको बुरा बुरा कहते हैं। मगर आज आपने मेरा दिल तोड़ दिया। आपके प्रति जो स्नेह का भाव हमारे दिल मे था उसे चकनाचूर कर दिया। एक विकास पुरूष इंसान और राष्ट्रभगत के दिमाग मे एक समुदाय के प्रति इतना ज़हर, इतना गुस्सा, इतना घिरना? आप तो रामभक्त हैं, बिहार के भावी मुख्यमंत्री हैं।रामजी ने तो ये शिक्षा तो नही दी थी, आप कहाँ भटक गए हैं। आपके पूरे भाषण को टकटकी लगाकर सुनता रहा की आपके भाषण में भगवान राम के आदर्श पूर्ण बातें, ग़रीब जनता के विकास, किसान मजदूर का दुख दर्द, सड़को पर घूमते बेरोज़गार युवा, बढ़ती महंगाई, भ्र्ष्टाचार, शिक्षा, स्वास्थ्य, बलात्कार जैसे मुद्दों पर अपनी पार्टी को आंख दिखाएंगे। मगर अफसोस हुआ कि आपने पूरे भाषण में सिर्फ और सिर्फ पाकिस्तान, हिंदुस्तान, हिन्दू, मुसलमान, राष्ट्रभगत, देशद्रोही, राममंदिर, बाबरी मस्जिद, नेहरु जिन्ना का ही बखाण किया और भारत माता की जय कारा लगवाते रहें। जयकारा लगाना अच्छी बात है मगर जनता हित बात आपने क्यों नही की। आप भक्तों को राष्ट्रभगत का अफ़ीम चटा कर झूमाते रहे ताकि कोई आपसे असल मुद्दों पर सवाल न करने लगे। आपके भाषण से मैं बहुत दुखी हूं, सदमे में हूँ। आपने मेरा विश्वास तोड़ दिया। दिल करता है मेरे दिल तोड़ने के जुर्म में आपके ख़िलाफ़ थाने में रपट लिखा दूं। आपने अपने भक्ती में विलीन एक अंदभक्त कम कर लिया। मालूम, नही बाकियों के आंख कब खुलेंगे। फिर भी मैं ऊपर वाले से आपके सदबुद्धि के लिए प्राथना करूँगा। *गिरिराज बाबू, I Love You*