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नरक का नजारा करना है तो….. पटना के सब्जीबाग में आपका हार्दिक स्वागत है

नरक का नजारा करना है तो….. पटना के सब्जीबाग में आपका हार्दिक स्वागत है
 अशरफ अस्थानवी
अगर इसी जन्म में नरक का नजारा करना हो तो बरसात में वार्ड नं॰- 40 के अंतर्गत सब्जीबाग चले आइये। अर्थाथ पटना का वह क्षेत्रा जो पीरबहोर थाना के अन्तर्गत आता है। अब्दुल बारी पथ से उत्तर महेन्द्रुू घाट एक और इध्र भंवरपोखर से लेकर लंगरटोली चैराहा तक। बारिश हो रही हो तो नजारा तालाब का होता है। थम जाने के बाद भी कई दिनों तक नालियों और सड़कों के बीच समानता का सिद्धांत अपना काम कर रहा हातेा है।
 उपर से आवारा कुत्तों की धमाचैकड़ी और उछल कूद ऐसी कि सामान्य राहगीरों का बचबचाकर चलना फिरना भी मुश्किल। कुत्तों का ऐसा साम्राज्य कि मत पूछिये। ये आवारा कुत्ते इतने सिर चढ़े कि उन्हें गुस्सा तनिक भी बर्दाश्त नहीं। राहगीर अपने चक्कर में कुत्तों के ध्यान से चूक गये तो फिर खैर नहीं है। पिछले एक माह में कम से कम पन्द्रह लोगों को अपना शिकार बना चुकें हैं। मासूम बच्चों को भंभोड़ने में तो ये मास्टर है। इस स्थिति की चिन्ता ना तो प्रशासन को है और ना ही जनप्रतिनिध्यिों की ।
हाँ तो हम बात कर रहे थे बारिश के पानी और सब्जी बाग के पुराने रिश्ते के बारे में । इस क्षेत्रा की बरसाती स्थिति को बरकरार रखने में सरकार का भी बड़ी अहम भूमिका है। गांधी मैदान से लंगर टोली जाने वाले अब्दुल बारी पथ के उँचाईकरण के कार्य के दौरान ही पटना उच्च न्यायायल द्वारा हस्तक्षेप करते हुए कहा गया था कि सड़कों की उँचाईकरण के दौरन इस बात का ध्यान रखा जाए कि सड़कें उफँची और आस पास के मुहल्ले तालाब न बन जाएँ। न्यायालय के हस्तक्षेप के बावजूद बारी पथ को इतना उँचा तो कर ही दिया गया कि बारी पथ से कदमकुआँ की ओर जाने वाली सड़क और दूसरी ओर बाकरगंज, भंवर पोखर सहित सब्जीबाग एरिया जुड़े मुहल्ले-इलाके बिरला मंदिर, दरियापुर, कुतुबुद्दीन लेन, चम्बल घाटी, दर्जीटोला, कोयरी टोला और फकीरबाड़ा इत्यादि घनी आबादी वाले मुहल्ले बरसात के दिनों में घर बैठे या चलते-चलते नौकाबिहार जैसे आनन्द की प्राप्ति करते रहें। इस आनन्द से छोटे छोटे स्कूल भी अछूत नहीं हैं। घर से लेकर सड़कों तक जलक्रिड़ा का पूरा प्रबंध। जब तक जलक्रिड़ा तब तक स्कूलों से छुटकारा। यदि स्कूल में पानी घुस गया हो तब तो और मजे। ना मास्टर साहब का पता और ना बच्चों का ठिकाना।
25 हजार की जनसंख्या वाले वार्ड नं॰ 40 के नागरिकों का दुभाग्य है कि यहाँ मूलभुत सुविध का जबरदस्त अभाव है। लंगरटोली से सब्जीबाग चैराहे तक की 300 मीटर पी.सी.सी. सड़क क्षतिग्रस्त है। जगह-जगह गड्हे, गिट्टी निकल आने के कारण राहगीरों को काफी कष्ट झेलना पड़ रहा है। हलकी बारिश होने पर भी यह सड़क जलमग्न हो जाती है। कमर भर पानी में लोग आवा-गमन को विवश होते हैं। लम्बे समय के बाद ही पानी निकल पाता है, बिरला मंदिर रोड के पश्चिम ओर वार्ड नं॰ 39 है तो पश्चिम भाग वार्ड 40 में आता है। वारिश होने पर दो तीन दिनों तक जल जमाव के कारण लोगों को जबरदस्त कष्ट झेलना पड़ता है, नालों और सिवरेज का पानी सड़कों पर तैरता रहता है।और पानी काला हो जाता है लेकिन सरकार के कानों पर जूँ तक नहीं रेंगती ।
सब्जीबाग तथा उसके आसपास के मुहल्ले की एक चैंकाने वाली बात यह भी है कि यहाँ के जल प्रबंध्न का उदाहरण शायद ही आपको कहीं और मिले। एक टिकट में दो खेल। कहावत बहुत पुरानी है। इसको चरितार्थ होता हुआ देखना है तो सब्जीबाग में आपका स्वागत और खुश आमदीद है। आप यहाँ पायेंगे कि जल निकासी और जलाअर्पूती की व्यवस्था में बिल्कुल समानता एवं एकरूपता है। जिस नालियों से घरों का पानी निकलता है, उन्हीं नालियों में जलाअर्पूती के लिए पाइप लाईन को भी बिछाया गया है। इस पाइप लाइन में जगह जगह लिकेज भी । शायद सरकारी तंत्र को इस बात की भनक लग गयी है कि मुस्लिम बहुल क्षेत्रों की सफाई कुछ कम भी रहे तो चलेगा । इसी कारण उसका पूरा ध्यान प्रायः उन क्षेत्रों पर केन्द्रित रहता है जहाँ मुसलमानों की आबादी अपेक्षाकृत कम है। रह गयी बात दुषित पानी पीने, दुषित भोजन करने तथा दुषित वातावरण में सांसे लेने से होने और फैलने वाली बीमारियों की तो बीच सड़क पर सरेआम गउरक्षकों के लाठी डंडों से मार खा-खा कर मरने से तो अच्छा है कि सरकार की नीतिगत व्यवस्था में ही रह कर हँसी-खुशी मर जाया जाए ।
बिहार की राजधनी पटना का सबसे बुराहाल नालों का है। पाॅलीथीन में जब पानी भरजाता है तो वह फूल जाता है, जिससे नालियाँ जाम हो जाती है। पहले भी व होती थी, तो पानी नालियों से निकल जाता था और कुछ को धरती सोख लेती थी। लेकिन पक्की सड़क और पाॅलीथीन ने वहाँ भी जहाँ पक्की सड़क नहीं है, जल को धरती में सोखने नहीं देता जिससे धरती का जलस्तर तेज़ी से नीचे जा रहा है। वहीं मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी नष्ट हो रही है। पाॅलीथीन जलाने से ज़हरीली गैस दम घोटने लगलती है। आवारा गाय पाॅलीथीन के साथ खाद्य सामग्री को खा जती है, पाॅलीथीन पेट में जमा होकर उसकी अकाल मृत्यु का कारण भी बनती है। इस लिए नीतीश सरकार को शारब बंदी की तरह पाॅलीथीन से राज्य विशेष कर पटना वासीयों को मुक्ती दिलाने हेतु क़ड़े क़दम उठाने होंगे तभी जल जमाव तथा प्रदूषन से नगर वासीयों को राहत मिल सकती है।