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शिक्षक बनने के लिए 50 फीसदी अंक की अनिवार्यता हो गयी समाप्त

शिक्षक बनने के लिए 50 फीसदी अंक की अनिवार्यता हो गयी समाप्त

स्टार न्यूज टूडे (इस्क्लूसिव रिपोर्ट)
राकेश पाण्डेय
लखनऊ। देश भर के ऐसे युवक जो टिचर बनने के लिए सपने देखते है उनको हाईकोर्ट ने बड़ा तौफा देने का काम किया है। अब अभ्यर्थी को प्राथमिक स्कूलो में शिक्षक बनने के लिए स्नातक में 50 प्रतिशत अंक होने की बाध्यता नही होगी। साथ ही इस आदेश की गाईड लाईन भी राष्ट्रीय शिक्षक प्रशिक्षण परिषद में जारी कर दी है और नियमावली के सापेक्ष्य इलाहाबाद हाईकोर्ट में हलफनामा भी दाखिल कर दिया गया है।
बताया जाता है कि शिक्षण प्रशिक्षण परिषद एन0सी0टी0ई0 ने शैक्षिणित योग्यता के आधार पर अंक प्रतिशत को लेकर बड़ा बदलाव किया और यह निश्चित कर दिया है कि शिक्षक बनने के लिए किसी अभ्यर्थी को स्नातक स्तर पर 50 फिसदी अंक न होने पर अयोग्य घोषित नही किया जायेगा। जिससे प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक पद पर नियुक्ति के लिए प्रतिशत अंक अनिवार्यता समाप्त हो गयी है। मौजूदा स्थिति को स्पष्ट करते हुए परिषद की ओर से बाताया गया है कि टिचर बनने के लिए आवश्यक बी0एड0 कोर्स में भी 50 फीसदी अंक की अनिवार्यता नही होगी। हालांकि एन0सी0टी0ई0 ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह नियम 28 जून, 2018 की अधिसूचना के पूर्व स्नातक करने वालो के लिए ही लागू होगा। यानि 1918 के पहले स्नातक करने वालो पर यह अनिवार्यता लागू नही होगी।

एन0सी0टी0ई0 ने 2011 में जारी किया था अनिवार्यता का आदेश

29 मई, 2011 को अधिसूचना जारी कर यह कह दिया गया था कि सरकारी स्कूल में अध्यापक बनने के लिए स्नातक में 50 फीसदी अंको की अनिवार्यता का नियम लागू हो गया है। इस आदेश के तहत तमाम अभ्यर्थियों को सेवा से हटा भी दिया था और उसी को एक अभ्यर्थी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में चैलेंज किया था और कहा था कि यह काला कानून है और लाखों बेरोजगार युवक जो शिक्षा की अलख जगाकर अपना परिवार चलाने के साथ-साथ शिक्षित बनाना चाहते है उनका अपमान है।

आदेश से क्या होगा शिक्षको या हटाये गये लोगो का फायदा

इलाहाबाद हाईकोर्ट में एन0सी0टी0ई0 द्वारा हलफनामा दाखिल होने के बाद अब बड़ी संख्या में इसका लाभ अभ्यर्थियों को मिलेगा। एक तरफ उन शिक्षको की नौकरी वापसी हो जायेगी जिन्हे 50 फीसदी अंको की निवार्यता पूरी न करने पर सेवा से बाहर कर दिया गया था। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अंक प्रतिशत अनिवार्यता के कारण नौकरी से हटा दिये गये लोगो को स्पष्टीकरण के बाद मौजूदा नियम का लाभ देने की बात कही है।

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