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तीन तलाक़ के अध्यादेश पर जदयू को आपत्ति, नितीश की पार्टी राज्यसभा में विरोध करेगी

तीन तलाक़ के अध्यादेश पर जदयू को आपत्ति, नितीश की पार्टी राज्यसभा में विरोध करेगी
अशरफ अस्थानवी
आनन फानन केंद्रीय मंत्री मंडल से  तीन तलाक पर अध्यादेश की स्वकृति और इसे राष्ट्रपति  के पास अंतिम मुहर लगाने के लिए भेजे जाने पर एन डी ए की अहम्  सहयोगी जनतादल यू  ने केंद्र  सरकार के इस फैसले का विरोध किया है  राज्यसभा में जदयू संसदीय दल के नेता आर सी पी  सिंह ने केंद्रीय कैबिनेट के इस विवादित फैसले को गलत करार दिया है.
नीतीश कुमार के सबसे क़रीबी  आर सी पी सिंह ने केंद्रीय कैबिनेट के फैसले से असहमति जतायी है. उन्होंने कहा कि तीन तलाक संवेदनशील मसला है और इस पर सरकार को फैसला नहीं लेना चाहिये.  आर सी पी ने जोर देकर कहा कि जदयू का स्पष्ट मानना है कि तीन तलाक पर फैसला लेने का हक मुस्लिम समाज को है. लिहाजा केंद्र सरकार को खुद निर्णय लेने के बजाय उसे मुस्लिम समाज के जिम्मे छोड़ देना चाहिये. जदयू नेता ने कहा कि अभी केंद्रीय कैबिनेट ने अध्यादेश को मंजूरी दी है, कोई एक्ट नहीं बना है. कानून बनेगा तो जदयू अपनी राय खुल कर रखेगा.
जाहिर है तीन तलाक के मसले पर जदयू बीजेपी के खिलाफ खड़ी हो गयी है. अंदर की बात ये है कि नीतीश कुमार किसी भी सूरत में अपने उपर मुस्लिम विरोधी का लेवल नहीं लगने देना चाहते हैं. लिहाजा केंद्रीय कैबिनेट के फैसले के तुरंत बाद आर सी पी सिंह का बयान आया. आर सी पी  के बयान को नीतीश के व्यक्तिगत ही बयान माना जा सकता है.
तीन तलाक पर अपने स्टैंड का संकेत नीतीश ने काफी पहले दे दिया था. तीन तलाक पर रोक के खिलाफ पटना में अप्रैल माह में आयोजित दीन बचाओ-देश बचाओ रैली का आयोजन किया गया था जिस में मुख्य मंत्री का पूर्ण समर्थन प्राप्त था, रैली ऐतिहासिक हुई थी . इस रैली में नरेंद्र मोदी सरकार के मुस्लिम विरोधी नीतियों की भरस्ना की गई थी।  जाहिर है नीतीश ने उसी वक्त साफ कर दिया था कि वे तीन तलाक के मसले पर बीजेपी नहीं बल्कि इसका विरोध कर रहे मुस्लिम नेताओं के साथ हैं. वैसे भी बी जे पी में साथ होने के बावजूद जदयू का अपना स्टेण्ड अलग है, तमाम विवादित मुद्दों पर नितीश कुमार की पार्टी जदयू का दृष्टिकोण अलग है।
जदयू की मुखालफत के बाद अब ये स्पष्ट हो गया है कि राज्य सभा में जदयू इस की मुखालफत कर सकता है। परिणाम स्वरूप राज्य सभा से विधेयक पास होना असंभव है।