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GAYA में BUMS के स्टूडेंट्स का उग्र प्रदर्शन। दो साल से रिज़ल्ट नहीं निकलने से परेशान हैं स्टूडेंट्स।

GAYA में BUMS के स्टूडेंट्स का उग्र प्रदर्शन। दो साल से रिज़ल्ट नहीं निकलने से परेशान हैं स्टूडेंट्स।
FAISAL RAHMANI
Star News Today
 
                     GAYA : बीयूएमएस के फ़र्स्ट ईयर का रिज़ल्ट जारी करने की मांग कर रहे तिब्बी कॉलेज के स्टुडेंट्स ने आज गया के डुमरी चाकन्द स्थित नेज़ामिया यूनानी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के सामने जमकर हंगामा किया। कल इन्हीं छात्रों ने पटना के गर्दनीबाग में एक दिवसीय धरना दिया था। छात्र-छात्राओं की मांग है कि बीयूएमएस (बैचलर ऑफ़ यूनानी मेडिसिन एंड सर्जरी) सेशन 2015-16 के फ़र्स्ट ईयर का रिज़ल्ट जारी किया जाए। धरने के बाद भी जब छात्रों की बात नहीं मानी गई तो उन्होंने बिहार के अन्य चार कॉलेजों में ताला जड़ कर उग्र प्रदर्शन किया।
                     गया में हंगामा करने के बाद कॉलेज के प्रिंसिपल ने छात्रों के प्रतिनिधिमंडल से बात कर उनका पक्ष जाना और उन्हें पूरी मदद करने का भरोसा दिलाया। 2013-14 बैच के स्टूडेंट हुमायूं नसीम के नेतृत्व में कॉलेज के प्रिंसिपल को ज्ञापन सौंपा। प्रिंसिपल ने छात्रों को भरोसा दिलाया कि यूनिवर्सिटी अगर उनकी बात नहीं मानेगी तो वह हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाएंगे। प्रदर्शन के दौरान सत्र 2013-14 से लेकर 2016-17 के सैंकड़ों छात्र-छात्राएं मौजूद थे।
                     स्टूडेंट्स का कहना है कि बीयूएमएस सत्र 2015-16 के फ़र्स्ट ईयर की परीक्षा सितंबर 2017 में हुई थी, लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी परीक्षा का रिज़ल्ट नहीं आया है। उनका कहना है कि एक तरफ़ तो उनका सेशन लेट चल रहा है और ऊपर से अभी तक रिज़ल्ट भी जारी नहीं किया गया है। यही हालात बिहार के अन्य सभी यूनानी कॉलेजों में है।
                     अपने करियर को लेकर चिंतित स्टूडेंट्स का कहना है कि इस पूरे मामले में मुज़फ़्फ़रपुर स्थित बीआर अम्बेदकर यूनिवर्सिटी के वाईस चांसलर की ग़लती है, क्योंकि सभी कॉलेज का एफ़िलिएशन बीआर अम्बेदकर यूनिवर्सिटी से ही है। उनका कहना है कि नए सिलेबस को अभी तक राजभवन से रेगुलेशन नहीं मिला है, जो कि साल 2013 में ही मिल जाना चाहिए था। रेगुलेशन को गर्वनर के बिना एप्रूवल के ही वाईस चांसलर ने अब तक तीन बार परीक्षा ले लिया। सभी छात्र-छात्राएं मानसिक रूप से काफ़ी तनाव में हैं। उनका भविष्य उन्हें अंधकार में जाता दिख रहा है। उनका कहना है कि चार साल का बीयूएमएस का कोर्स कब तक पूरा हो पाएगा, ये उन्हें नहीं पता। ऐसे में हकीम बनने का सपना दूर की कौड़ी लग रही है।
                     ग़ौरतलब है कि बिहार में कुल पांच यूनानी कॉलेज हैं, जिनमें पटना स्थित गवर्नमेंट तिब्बी कॉलेज एंड हॉस्पिटल एकमात्र सरकारी कॉलेज है। चार अन्य कॉलेज दरभंगा स्थित सल्फ़िया यूनानी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, गया स्थित नेज़ामिया यूनानी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, सिवान स्थित ज़ुल्फ़िक़ार हैदर यूनानी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, चकिया (मोतिहारी) स्थित सूफ़िया यूनानी यूनानी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल प्राइवेट कॉलेज हैं। कहने को तो इन कॉलेजों में हकीम यानी बीयूएमएस की पढ़ाई होती है। पर बीयूएमएस के चार साल का कोर्स ख़त्म होने में 8 से 10 साल तक लग रहे हैं। आलम यह है कि बीयूएमएस सेशन 2015-16 के फ़र्स्ट ईयर का रिज़ल्ट अभी तक जारी नहीं किया गया है, जिसको लेकर छात्रों में काफ़ी नाराज़गी देखी जा रही है। परेशान और अपने करियर को लेकर चिंतित स्टूडेंट्स लगातार रिज़ल्ट जारी करने की मांग कर रहे हैं, पर अभी तक रिज़ल्ट जारी नहीं किया गया।
                     रिज़ल्ट जल्द-अज़-जल्द घोषित किये जाने की मांग को लेकर नेज़ामिया यूनानी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, गया में स्टूडेंट्स ने लगातार तक़रीबन पांच घण्टे तक भूखे-प्यासे प्रदर्शन किया। इस अवसर पर मोती-उर-रहमान, मो. फ़सीहउद्दीन, समरीन ख़ान, अरशी निगार, मो. सुफ़ियान, अख़्तर रज़ा, असजद आलम, राशिद अहमद, अबुल कलाम हक़्क़ानी समेत सैकड़ों की संख्या में छात्र-छात्राओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
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