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नव वर्ष के आगमन पर  शिकारी आएगा, जाल बिछायेगे, दाना डालेगा, लालच में मगर फंसना नहीं………………………….!

नव वर्ष के आगमन पर  शिकारी आएगा, जाल बिछायेगे, दाना डालेगा, लालच में मगर फंसना नहीं………………………….!

वर्ष 2018 अपनी खट्टी मीठी यादें छोड़ कर हम लोगों से विदा होने को है और नव वर्ष 2019 का हम लोग स्वागत के लिए तैयार बैठे हैं ये वर्ष जो बीत चूका है इस का आरम्भ मोब लिंचिंग और महिला योन उत्पीड़न के प्रत्येक दिन हुई घटनाओं के बीच चुनाव और उप चुनाव की घन गरज के साथ हुआ था। पुरे वर्ष में देश वासी नेताओं के ज़हरीले भाषण और घिर्णित और समाज को बाटने वाली वक्तवों से तिलमिला उठे थे । उप चुनाव सेमी फाइनल था भाजपा कांग्रेस मुक्त भारत का सपना देखती रही लेकिन देश के जागरूक नागरिकों ने अपना निर्णय सेमी फाइनल में दे दिया और 15 वर्षों से भाजपा शासित मध्य प्रदेश, राजस्थान और छतीसगढ़ से भाजपा का सफाया हो गया। आने वाले फाइनल चुनाव में भी यही फॉर्मूला देश वासी अपनाएंगे हालाँकि २०१९ के फाइनल में भाजपा महारथी पहले से अधिक आक्रामक रुख अपनाएंगे वो अपने वादे तो पुरे नहीं कर सकेंगे लेकिन शेष बची हुई अवधि में ये संभव भी नहीं है इस लिए इस बार भी वही पुराना नुस्खा यानी मंदिर मस्जिद को चुनावी स्टेन्ट बनाया जायेगा और इस बात की पूरी कोशिश कि जाएगी के लोग सब कुछ भूल कर एक अवसर और प्रदान करें। ये भी संभव है के इस बार नए वादों का तड़का भी लगा दिया जाए की ये 5 वर्ष तो व्यवस्था सुधारने में ही गुजर गया एक अवसर और प्रदान किया जाए……. सारे वादे सूद के साथ चूका दिए जायेंगे, यानी एक बार फिर शिकारी आएगा, जाल बिछायेगे, दाना डालेगा, लालच में मगर फंसना नहीं।
आशा है के देश के लोग इस बार मुर्ख नहीं बनेंगे बल्कि खुद को बेवक़ूफ़ समझने वालों को बेहतरीन जवाब दे कर अपना सारा हिसाब चुकता करेंगे।
अशरफ अस्थानवी