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 पृथ्वी के भगवान ” डाँक्टर ” लुटेरा हैं शतर्क होकर चुने-सुरेंद्र

 पृथ्वी के भगवान ” डाँक्टर ” लुटेरा हैं शतर्क होकर चुने-सुरेंद्र
* शहर के चिकित्सक अपने क्लिनिक में ही नाजायज़ तौर पर खोल रखे हैं, ऐक्सरे, अल्ट्रासाउंड, जाँचधर, दवा दुकान
* जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग के साथ समाजिक सारोकार से जुडे लोगों से आगे आने की अपील- माले
समस्तीपुर (मोहम्मद जमशेद)10 जनवरी 2019
जी हाँ,मरने को बचाते रहने के कारण पृथ्वी पर भगवान के टाईटल से नवाजे गए चिकित्सक समय के साथ बदलते चले गए। आज बदलाव यहाँ तक आ गया कि वे ऐनकेनप्रकारेण पैसा-पैसा और सिर्फ पैसा कमाना चाहते हैं। आज इनकी सेवा भावना का स्थान बदलकर सिर्फ पैसा कमाकर दो-चार एकड़ जमीन, महल और फिर यहाँ तक की अपने नकारा बच्चे को डोनेशन देकर पुनः डाँक्टर बनाकर आनेवाली पीढ़ी को लूटने के लिए तैयार कर लेना इनका उद्देश्य बन गया है। यही कारण है कि बहुत से बाहरी चिकित्सक शहर में आकर जमे पडे हैं और करोड़ों-करोड़ की अकूत चल -अचल संपत्ति का मालिक बन बैठे हैं तथा सरेआम ” लूटफैक्ट्री” चला रहे हैं। कोई आश्चर्य नहीं होगा अधिकांश डाँक्टर दवा बनाने की अपनी कंपनी तक खोल तक खोल रखे हैं। बस क्लिनिक में सिर्फ एकाक दवा को छोड़कर अपनी ही दवा लिखते हैं।केंद्र राज्य एवं केंद्र सरकार की कानून की कमजोरियों को ढ़ुढ़कर दवा कंपनी धड़ल्ले से संचालित करते  बात खुलने पर झट से कंपनी का नाम भी बदल देते हैं। अपने को बचाये रखने के लिए ऐसे डाँक्टर राजनीतिक पार्टी, प्रशासनिक अधिकारी, दबंग आदि का सहारा अपने बचाव हेतु लेते रहते हैं।अब तो ये सीधे तौर पर अपनी सुरक्षा एवं संरक्षा हेतु राजनीति भी ज्वाईन करने लगे हैं।
    ऐसा नहीं कि सब डाँक्टर लूटेरे ही हैं। कुछ अच्छे भी हैं पर कमाऊ डाँक्टर के बड़े-बड़े हार्डिंग, विज्ञापन, प्रचार-प्रसार के सामने बेचारे अच्छे डाँक्टर जमींदोज होकर रह जाते हैं।
 पेट दर्द की शिकायत लेकर ताजपुर के सरसौना डीह निवासी भगलू सिंह के पुत्र जितेन्द्र कुमार 25 शहर के एक प्रसिद्ध डाँक्टर (एमडी) के यहाँ दिखाने आये, डाँक्टर ने उसे तमाम प्रकार के करीब 1500 सौ रूपये की जाँच अपने ही क्लिनिक में करबा दिए।आश्चर्य है कि पेट दर्द में ऐक्सरे एवं ईसीजी तक करबाना पड़ा। पैसा कम रहने के कारण घर से फोन कर पैसा मंगवाना पड़ा। ठीक इसी प्रकार ताजपुर के रामापुर महेशपुर के राजखंड निवासी विजय कुमार महतो के पुत्र राहूल कुमार 20 शहर के ही एक प्रसिद्ध चिकित्सक से दिखाये तो उनको 4 हजार 1 सौ रूपये के जाँच लिखे दिए, बेचारा करबाया भी, आखिर मरता क्या नहीं करता। शहर के एक जाने -माने मेरे पत्रकार मित्र एक चिकित्सक से दिखाने के बाद जाँच कराये तो 360 रूपये लिया गया, मुझे बोले सुरेंद्र जी वहाँ जाँच कराने पर 210 रूपये ही लगता था, खैर वे पत्रकार हैं कहें माले वाला मार नहीं कलम वाला मार मौका मिलने पर मारेंगे आदि-आदि। गर्भवती महिला को पेन कीलर देकर आँपरेशन को मजबूर करना, छोटा बीमारी को बढ़ा चढ़ाकर बताना ऐसे अनेक यत्न कर मरीजों और परिजनों को वास की जमीन, मंगलसूत्र तो बचबाते हैं, कभी-कभी इज्जत उतार लेते हैं या उतरबाने को मजबूर कर देते हैं। याद दिला दूँ कि पिछले दिनों शहर के कमला ईमरजेंसी हाँस्पिटल में जिस हल्का बर्न रोगी सिरियस बताकर एक दिन में ही 35 हजार रूपये का बिल बनाकर बंधक बनाया गया था, हंगामा के बाद उसे शहर के दूसरे क्लिनिक में रेफर कराया गया था, वे सस्ते ईलाज में ही ठीक हो गई हैं। बड़ी लूट की संभावना को देखते हुए आज बड़ी संख्या में लोग मेडिकल व क्लिनिक क्षेत्र में प्रवेश कर रहें हैं और कमा भी रहे हैं। भाकपा माले के सुरेंद्र प्रसाद सिंह,मानवाधिकार कार्यकर्ता मो० सगीर एवं ऐपवा के जिलाध्यक्ष बंदना सिंह ने इस क्षेत्र में प्रबुद्ध लोगों को ईकट्ठा कर अपने अभियान को तेज करने की रणनीति आगे बढ़ाने की बात कही है।