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वेलेंटाइन डे बेषर्मी और अय्याषी का दिन

वेलेंटाइन डे बेषर्मी और अय्याषी का दिन

हाफ़िज़ हाषिम क़ादरी मिस्बाह़ी
मुह़ब्बत, प्यार, इश्क़ इस काएनात का ज़्ाहूर, उसकी तमाम तर रोनक़ और रेनाई मुह़ब्बत ही के दम से हैं। मुह़ब्बत पाक लफ़्ज़ है, मुह़ब्बत के नाम पर अय्याशी करना हवस परस्ती करना सख़्त बुराई और घिनौना काम है। जैसे कि आज कल के नौजवानों में यह आम बात है। इसी लिए मज़हबे इस्लाम में नौजवानों को निकाह़, शादी की तरग़ीब दी गई है। ह़दीस का मुख़्तसर मफ़हूम ‘‘नौजवानों निकाह़ कर लो, निकाह निगाह को नीचा और शर्मगाह की हिफ़ाज़त करता है। (बुख़ारी शरीफ़ः ह़दीस 5065-5066)
सालेह़ और पाकीज़ा मुअ़ाशरे के लिये निकाह, शादी जल्दी करना बहुत ही ज़रूरी है। आज मुह़ब्बत के नाम पर नौजवान लड़के-लड़कियाँ बे-शर्म मजनू और लैला ऐश व इशरत के नए नए अन्दाज़ में दिन मना रहे हैं। बड़ा दिन, नया साल, वेलेंटाइन डे वग़ैरह वगै़रह। जिसे संेट वेलेंटाइन डे का त्यौहार भी कहा जाता है। मुह़ब्बत के नाम पर यह मख़्सूस अ़ालमी दिन वेलेंटाइन डे है। इसे हर साल 14 फ़रवरी को सारी दुनिया में बड़े पैमाने पर मनाया जाता है। इस दिन नौजवान लड़के और लड़कियाँ शादी ग़ैर शादी शुदा जोड़े एक दूसरे को फूल और तोह़फ़े तह़ाइफ़ देकर अपनी मुह़ब्बत का इज़हार करते हैं। अब तो ह़द ही हो गई नौजवान लोग अपने भाई, बहनों, माँ-बाप, रिश्तेदारों को भी फूल और मुबारकबाद पेश करते हैं।
मुह़ब्बत एक पाक जज़्बा है यह क्यों और कैसे होती है, अच्छी बात तो सबको अच्छी लगती है, लेकिन जब तुम्हें किसी की बुरी बात भी बुरी न लगे तो समझो तुम्हें उससे ‘‘मुह़ब्बत’’ हो गई है। राह़त हो, सरवर हो या रंज व ग़म, नफ़ा हो या नुक़सान, हर ह़ाल में अपनी ख़्वाहिश को ख़त्म करके मह़बूब की ख़्वाहिश के सामने सर तस्लीम कर देने का नाम ‘‘मुह़ब्बत’’ है। मुह़ब्बत की मुख़्तलिफ़ ह़ालतें होती हैं। जैसे अल्लाह तअ़ाला से मुह़ब्बत, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से मुह़ब्बत, अपने अज़ीज़ों और रिश्तेदारों से मुह़ब्बत, माँ-बाप, भाई-बहन, बीवी-बच्चों से मुहब्बत, अपने घर कारोबार, गाँव, शहर से मुह़ब्बत, जानवरों से मुह़ब्बत, दुनिया से मुह़ब्बत वगै़रह वगै़रह। अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त अपने बन्दों से मुह़ब्बत फ़रमाता है। कु़रअ़ाने मजीद में मुख़्तलिफ़ अन्दाज़ में मुह़ब्बत का ज़िक्र हैः तर्जुमाः बेशक अल्लाह नेकोकारों से मुह़ब्बत फ़रमाता है। (सूरह बक़रहः 2, आयत 195)
अल्लाह अपनी तमाम मख़्लूक़ पर मेहरबान है, उसकी सिफ़त रह़मान व रह़ीम है। अल्लाह के नेक बन्दे भी अल्लाह से मुह़ब्बत करते हैं। कु़रअ़ाने करीम में हैः तर्जुमाः और जो लोग ईमान वाले हैं वह (हर एक से बढ़कर) अल्लाह से ही ज़्यादा मुह़ब्बत करते हैं। (सूरह बक़रहः 2, आयत 165)
लफ़्ज़े ‘‘मुह़ब्बत’’ बहुत ही पाक व साफ़ है और ‘‘मुह़ब्बत’’ दुनिया का सबसे ख़ूबसूरत ज़ज्बा है, लेकिन मतलब परस्तों और ह़वस परस्तों ने अपनी ख़ुदगर्ज़ी और ज़रूरतों के तह़त उसे गन्दा और बदनाम कर दिया है।
गै़र फितरी व नाजाईज़ काम को भी मुह़ब्बत का नाम देते हैं, जो सरासर ग़लत है। मुह़ब्बत की ख़ुबियों व ख़राबियों की बहुत तफ़सील है, मुह़ब्बत की सबसे बड़ी ख़राबी माहिरीन यह बताते हैं कि मुह़ब्बत अंधी होती है। हालाँकि फिलोस्पी और मुह़ब्बत करने वाले मुह़ब्बत को अन्धी नहीं मानते। बेहरह़ाल मुह़ब्बत का अलग अलग जज़्बा है। आज का नौजवान मुह़ब्बत के नाम पर अय्याशी का दरवाज़ा खोल दिया है। जो अब रूकने का नाम नहीं ले रहा है, इसी में वेलेंटाइन डे को भी शामिल कर लिया है।
14 फ़रवरी को वेलेंटाइन डे मुह़ब्बत का दिन नहीं, हक़ीक़त में मुह़ब्बत का यौमे शहादत है। वेलेंटाइन डे ‘‘दिन’’ के ह़वाले से हमारे मुस्लिम नौजवानों की मालूमात में गै़र मामूली इज़ाफ़ा हुआ है। जहाँ इसके मनाने वाले जोश व ख़रोश का मुज़ाहरा करते हैं। वहीं उस दिन की मुख़ालिफ़त करने वाले भी कम नहीं, सवाल यह पैदा होता है कि अगर वेलेंटाइन डे ‘‘दिन’’ जैसी रिवायत मौजूद न होती तो क्या दुनिया में लोग इज़हारे मुह़ब्बत न करते।
सिर्फ चन्द बे शर्म नौजवान ऐसे हैं जो इस दिन को अय्याशी के ह़वाले से मनाते हैं, या मना सकने की ताक़त रखते हैं। ऐसे लोग ज़्यादातर अमीर भी नहीं कर सकता, हमारे समाज में क्या कोई मुह़ब्बत नहीं करता था या खाना बदोश्त घरों से ताल्लुक़ रखते हैं। एक ग़रीब तो उसे बर्दाश्त अब नहीं करता जो आज का नौजवान वेलेंटाइन डे मनाकर दुनिया को मुह़ब्बत करना सिखा रहा है। आज तो तमाम टी0वी शो बेशर्मी के साथ मुह़ब्बत करना सिखा रहे हैं। इससे बढ़कर जितने गाने हैं, सब ही बेशर्मी के साथ मुह़ब्बत का सबक़ दे रहे हैं, बल्कि लोग कहानियाँ और आज की नंगी व बेशर्मी फिल्में मुह़ब्बत सिखा रही हैं, फिर क्यों हमारा नौजवान फै़शन के नाम पर बेह़याई व बेशर्मी के तमाम रिकाॅर्ड टूटता जा रहा है।
ह़या नहीं ज़माने के आँख में बाक़ी।
अहदे नौ के फैशनों ने सब के यूँ बदले हैं रंग।
देखकर उनकी अदायें, अक़ल रह जाती है दंग।।
नत नए अन्दाज़ में यूँ महो हैं पीर व जवाँ।
जिस तरह कि डोलती है, डोर से कई पतंग।।
घेर में शलवार के कोई तो लाए पूरा थान।
आध गज़ कपड़े में कोई सूट को कर डाले तंग।।
वो ह़या जो कल तलक थी मशरिकी चेहरे का नूर।
ले उड़ी इस निकहते गुल का यह तहज़ीबी फिरंग।।
कोई फटी जिन्स को समझा है हस्ती का उरूज।
ख़्वाहिशे उरय्याँ ने है फैशन का पाया उज़रे लंग।।
मैं मुख़ालिफ़ तो नहीं जिद्दत पसन्द का मगर।
खाना जाये मशरिक़ी इक़्दार को छमछमी पुलंग।।
मुख़्तसर इतना कि सरवर, एह़तिमाल यह भी रहे।
तुन्द सेह़रा के लिये होता नहीं हरगिज़ कलंग हंस।।
रोमन कैथोलिक चर्च के मुताबिक़ वेलेंटाइन डे एक नौजवान पादरी था। जिसे सन् 270 ई0 में शहीदे मुह़ब्बत कर दिया गया था। कहते हैं माक्र्स आरे लुईस रोम का बादशाह था। बादशाह को अपनी फ़ौज में इज़ाफ़े के लिये फ़ोरी तौर पर फ़ौजियों की ज़रूरत पड़ गई तो उसने हर मुल्क में अपने नुमाइन्दे फैला दिये, ताकि वह उसके लिये कुंवारे नौजवान भर्ती कर सकें। रोमी फौजी नौजवानों ने शादियाँ करना शुरू कर दीं।
शंहशाह को इत्तेला पहुँची तो उसने शादियों पर पाबन्दी नाफ़िज़ कर दी। वेलेंटाइन पादरी ने बादशाह के हु़क्म को नाजाईज़ क़रार दे दिया। ख़ुफ़िया शादियाँ कराने लगा। यह बात ज़्यादा देर तक छुपी न रह सकी और उसे गिरफ़्तार कर लिया गया। कै़द के दौरान नौजवान पादरी को दरोग़ा की बेटी से इश्क़ हो गया, उसकी पादाश (सज़ा) में वेलेंटाइन पादरी का सर क़लम कर दिया गया। रोमन कैथोलिक चर्च 14 फ़रवरी को इसका यौमे शहादत मनाता है। तारीख़ से नावाक़ैफ़ियत से हम कैसे कैसे गुनाह के काम करते हैं। ईसाइ लोग पादरी के क़त्ल का दिन 14 फ़रवरी यौमे मुह़ब्बत के नाम पर मनाते हैं। अगर हमको मुह़ब्बत ही बाँटना है तो सभी से मुह़ब्बत करें और हर दिन करें। वेलेंटाइन पादरी तो दूसरों की शादियाँ करवाया करता था, शादी कराना तो सवाब का काम है। क्या आज के दौर में मजनू वेलेंटाइन डे के मौक़ा पर किसी ग़रीब लड़की से शादी करेंगे? या और किसी से ग़रीब की बेटी की शादी करा देंगे।???
आज मुस्लिम मुअ़ाशरे में जहेज़ की लानत की वजह से कितनी ग़रीब बच्चियाँ कंुवारी सिसक रही हैं। माँ-बाप की नींदें ह़राम हैं। आइये हम अहद करें, साल में कम से कम एक ग़रीब की शादी करायेंगे। इंशाअल्लाह या कम से कम ज़िन्दगी में एक ग़रीब लड़की की शादी करवायेंगे और ख़ुद भी बग़ैर जहेज़ की फ़रमाइश के शादी करेंगे। ख़ुदारा होश में आओ मुअ़ाशरे में फैली बुराईयों को रोकने की कोशिश करें न की और उसमें बढ़ावे का सबब बने कर गुनाहों का अम्बार लेकर अल्लाह के वहा पहुँचे। अल्लाह हम सबको बे ह़याई के कामों से बचने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाये। आमीन सुम्मा आमीन।