Headlines

ग़ज़ल

ग़ज़ल

सैयद आफ़ताब क़ैसरचरखारवी

इश्क़ का कैसा है दस्तूर तुम्हें क्या मालूम।
तुम बहुत हो गए मग़रूर तुम्हें क्या मालूम।

इक झलक देख के दीवाने बने बैठे हैं,
दिल से हम हो गए मजबूर तुम्हें क्या मालूम।

कोई रँगीन नज़ारे नहीं जचते तुम बिन,
सारी दुनियाँ लगे बेनूर तुम्हें क्या मालूम।

कितनी हसरत तुम्हें पाने की सदा रहती है,
है ये बेबस दिले रन्जूर तुम्हें क्या मालूम।

है वजह प्यार की जो तुमसे किया था हमने,
हम बहुत हो गए मशहूर तुम्हें क्या मालूम।

किस क़दर दर्द मिले ज़ख़्म मिले हैं हमको,
हो न जाये कहीं नासूर तुम्हें क्या मालूम।

हुस्न पे नाज़ करोगे तो ये होगा क़ैसर,
हो गए अपनो से तुम दूर तुम्हें क्या मालूम।