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मेहसौल में मुशायरा सह कवि सम्मेलन में शायरों-कवियों के कटाक्ष,मोहब्बत और तीखे शेरो शायरी,कविता-गजल की वर्षा में दर्शक स्नान करते नजर आए।

मेहसौल में मुशायरा सह कवि सम्मेलन में शायरों-कवियों के कटाक्ष,मोहब्बत और तीखे शेरो शायरी,कविता-गजल की वर्षा में दर्शक स्नान करते नजर आए।
गीतकार गीतेश के तंज, ” नेता उलझे चेयर मे और बाबा लव अफेयर मे, हम भी तो रह गये उलझ कर लाइक, कमेंट और शेयर में ” के बोल पर ठहाका से लोट पोट होते रहे दर्शक।
सीतामढ़ी(न्यूज, समाजिक कार्यकर्ता मो कमर अख्तर की कलम से)
अमन वेलफेयर सोसायटी के तत्वाधान मे अमन चैन व सदभावना को समर्पित मुशायरा सह कवि सम्मेलन मेहसौल स्थित आजाद चौक पर आयोजित हुआ। मुशायरा व कवि सम्मेलन की अध्यक्षता अशरफ मौलानागरी ने किया जबकि संचालन गीतकार गीतेश ने किया।
 अमन चैन व सदभावना को लेकर मुशायरा व कवि सम्मेलन आयोजन करने के लिए अमन वेलफेयर सोसायटी को मो कमर अखतर ने बधाई देते हुए कहा कि समय की जरूरत है, कि हम सभी आपसी भाईचारा व सदभावना बना समाज मे अमन चैन से रहे।
 जुनैद आलम ने कहा  ताजियादारी से दूर जलसा और मुशायरा का आयोजन किया जाता है,बिस्मिल का यह कदम प्रशंसनीय है, हम इनका समर्थन करते हैं।
 संस्था के अध्यक्ष हाजी हबीबुर रहमान एंव सचिव अलाउददीन बिस्मिल ने शायर एंव कवि को डायरी कलम देकर सम्मानित किया।
 सचिव व शायर अलाउद्दीन बिस्मिल ने कहा कि 2006 से मुहर्रम के अवसर पर ताजिया ढोल ताशा से दूर जलसा एंव मुशायरा का आयोजन किया जाता है। संस्था का मिशन मुहर्रम मे हो रही खुराफात से समाज को बचाना है।
 अशरफ मौलानागरी ने- जहां जाते हैं हम कुछ नकश अपना छोड़ देते हैं, अंधेरे दिल में उलफत का उजाला छोड़ देते हैं,
 सत्येन्द्र मिश्र ने, हर दिल है यहां देखो हकदार मुहब्बत का, कोई छीन नही सकता अधिकार मुहब्बत का,
रमा शंकर मिश्र ने तू आके, आके मिल, है मुश्किल मे दिल, है रूकने को सांसे, ढूंढूं मैं मेरी आंखें,
कृषणनंदन लछय ने कही पे रूके न ऐसी हवा है, मुहब्बत तो होती बड़ी बेवफा है पर दर्शको को झुमने पर मजबूर कर दिया।
 अलाउद्दीन बिस्मिल ने-जितने गुनहगार थे वो घर को आ गए, एक लड़की घर न पंहुची खुदा पुजने के बाद,
अनस कैफी ने दुखो और मजबूरियों की चीता में, वो देखो कोई बेकफन जल रहा है,
 कलीम साकिब ने, प्यार का काम भी नफरत से लिया जाता है, अपन के नाम पर क्या क्या नहीं किया जाता है,
गुफरान राशीद ने, मौजू मे तलातून है, आंखों में रवानी है, डुबती हुई कसती है भटका हुआ माही है पढ वाहवाही बटोरी।
 वहीं गीतकार गीतेश के तंज, नेता उलझे चेयर मे और बाबा लव अफेयर मे, हम भी तो रह गये उलझ कर लाइक, कमेंट और शेयर की खूब सराहना हुई।
सदभावना पर अजहरूद्दीन दिलकश ने आओ दिलकश मिलकर बनाए फिर से हंसी वह हिंदुस्तान, ईद मनाए हम जो अगर तो उनके घर भी दिवाली हो ने दर्शको को मंत्र मुग्ध कर दिया।
वहीं खुशदिल मौलानगरी की रचना,मोहब्बत से हम अपनी बात  का आगाज करते हैं, के दुशमन भी हमारी गुफतगु पर नाज करते हैं, प्रकाश मोहन मिस्र, हो गया हूं मजबूर साईकिल पर चढने को, अब चलाना मोटरे और कार छोड़ दूं क्या,
 मरहुम बदरूल हसन बदर की रचना जुनैद आलम ने, खडा हो कर भडे मजमा मे कयों सच बोलता है, किसी को आदत ये तेरी अच्छी नहीं लगती, बदर की रचना उनके पुत्र जफरूल हसन जफर ने, मैं अपने साथ रखता हूं हमेशा चांद और सूरज, अंधेरे मे सफर करना मुझे अच्छा नही लगता दर्शको को देर रात तक बैठने पर मजबूर किया। मौके पर पुर्व मुखिया अजीमुददीन,मो रफीक, मो दाऊद, मो आरजु, मो नौशाद खलील समेत सैकड़ों लोग मौजूद थे।
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