एनपीआर, एनआरसी से देशवासियों को खतरा नहीं, सरकार लिख कर देः बेदारी कारवाँ

दरभंगा लालबाग सत्याग्रह का 63 दिन हुआ पूरा, सीएए वापस होने तक सत्याग्रह जारी रहेगा

दरभंगाः प्रेस-विज्ञप्ति/20.03.2020
पूरी दुनिया में इन दिनों कोरोना वायरस को लेकर महामारी फैली हुई है। भारत में भी कोरोना वायरस से लोगों में दहशत का माहौल है। सरकार इस खतरनाक वायरस से निपटने की जगह देश की जनता के अंदर वायरस के नाम पर भय का माहौल बना रही है। पूरे देश में कोरोना वायरस से निपटने के लिए केन्द्र सरकार ने कोई ठोस उपाय नहीं किया है। मानों भाजपा ने देश में अघोषित इमर्जेन्सी लागू कर दिया है। सड़के सूनी पड़ी हैं, बाजारें बंद हो चुकी हैं, स्कूल, काॅलेज, माॅल आदि को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। पूरा शहर वीरान नजर आ रहा है। उक्त बातें आॅल इंडिया मुस्लिम बेदारी कारवाँ के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री नजरे आलम ने मिडिया से बातें करते हुए कही। श्री आलम ने बताया कि देश में तीन महिने से अधिक दिनों से देश की दूसरी सबसे बड़ी आबादी सीएए जैसे काले कानून के खिलाफ सड़कों पर बैठी हुई है। लेकिन ना तो देश के महामहिम राष्ट्रपती महोदय ने कोई संज्ञान लिया, ना प्रधानमंत्री और ना ही गृहमंत्री ने आज तक आन्दोलन कर रहे लोगों से कोई वात्र्ता किया है। केन्द्र सरकार के इस रवैये से यह स्पष्ट हो गया है कि वह देश के अल्पसंख्यकों विशेष कर मुस्लिम समुदाय के लोगों को दूसरे दर्जे का नागरिक बनाने और लोकतांत्रिक देश को हिन्दू राष्ट्र बनाने की गंदी पाॅलिसी पर काम कर रही हैं। श्री आलम ने कहा कि एनपीआर, एनआरसी देश के हर नागरिकों के खिलाफ है लेकिन सीएए में सिर्फ मुसलमानों को छोड़ कर सभी को नागरिकता देने की बात की जा रही है जो ना सिर्फ संविधान का उलंघन है बल्कि जानबूझ कर मुसलमानों को टारगेट बनाकर धर्म के आधार पर बनाया गया यह काला कानून है जिसे किसी भी हालत में देश की दूसरी बड़ी आबादी कबूल नहीं करेगी। मोदी और अमित शाह ने कहा कि एनपीआर और एनआरसी से देश के किसी भी नागरिकों को डरने की जरूरत नहीं है, सरकार की इन बातों को जनता तबतक नहीं मानेंगी जबतक सरकार लिख कर नहीं देती है क्योंकि देश के प्रधानमंत्री के झूठ बोलने का इतिहास रहा है। रामलीला मैदान में एनआरसी पर कुछ सुप्रीम कोर्ट में कुछ बोलते हैं, इसलिए मोदी-शाह की किसी भी मौखिक बातों पर भरोसा नहीं किया जा सकता है। देश की जनता से कागज मांगने वाले मोदी-शाह अब अपना कागज जनता को दिखाएं कि एनपीआर और एनआरसी से किसी भी समुदाय के लोगों को कोई नुकसान नहीं होगा। श्री नजरे आलम ने कहा कि हमारी असल लड़ाई सीएए के खिलाफ है। सरकार अगर मुस्लिम विरोधी नहीं है तो सीएए जैसा काला कानून अविलंब वापस ले नहीं तो सीएए कानून में संशोधन करके मुस्लिमों को भी जोड़े। देश में किसी भी हाल में धर्म के आधार पर कोई काला कानून लागू नहीं होने देंगे। पहले बिहार में दंगा, फिर उत्तर प्रदेश, फिर आसाम उसके बाद दिल्ली को दंगा की आग में झोंक दिया गया और दंगे में एकतरफा मुसलमानों को टारगेट किया गया इससे यह भी साफ हो चुका है कि भाजपा मुस्लिम विरोधी सरकार है और देश के मुसलमानों को जानबूझ कर मरवा रही है। श्री नजरे आलम ने कहा कि दरभंगा लालबाग सत्याग्रह का 63 दिन पूरा हो चुका है और कोरोना वायरस को देखते हुए सभी प्रकार के एहतेयात के साथ सत्याग्रह जारी है। यह सत्याग्रह उस वक्त तक चलता रहेगा जबतक केन्द्र की सरकार सीएए जैसे काले कानून को वापस नहीं लेती है। एक अप्रैल से होने वाले एनपीआर का हम लोग पूर्णरूप से बहिष्कार करेंगे और जरूरत पड़ी तो 1 अप्रैल को भारत बंद भी बुलाएंगे।
मांगें:-
1- एनपीआर से देशवासियों को कोई नुकसान नहीं होगा, सरकार लिख कर दे।
2- एनआरसी देश में लागू नहीं होगा, सरकार लिख कर दे।
3- सीएए जैसा काला कानून जो संविधान विरोधी कानून है, सरकार अविलंब वापस ले।
4- एनपीआर पर अगर सरकार लिख कर नहीं देगी तो एक अप्रैल को भारत बंद बुलाया जायगा।
5- अब जनता की नहीं सरकार की बारी है कि सभी मांगों पर सरकार श्वेत-पत्र लाए।