मुस्लिम धर्मगुरुओं का बड़ा कदम, नमाज़ मस्जिदों के बजाय घर में अदा करने का किया एलान

 

आमस

कोरोना वायरस के संक्रमण के खतरे को देखते हुए मुसलमानों के बड़े धार्मिक इदारे आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, जमीयतुल उलेमा, इमारत ए शरिया, दारूल उलूम देवबंद, इमाम संगठन, शाही इमाम जामा मस्जिद आदि सहित मुस्लिम सम्प्रदाय के धर्मगुरुओं ने देश के तमाम मुसलमानों से नमाज़-ए-जुमा घरों पर अदा करने की अपील की थी. उन्होंने साफ तौर से कहा था कि लॉकडाउन के बाद जुमे की नमाज़ मस्जिदों में अदा नहीं कि जाएगी. इसके मद्देनज़र प्रखण्ड के हमज़ापुर, सुपाई, सिमरी, गम्हरिया और सिहुली समेत तमाम मस्जिदों में जहां जुमे की नमाज़ अदा की जाती है वहाँ सोशल डिसटेनसिंग को फॉलो करते हुए उन्हीं लोगों ने मस्जिदों में‌ नमाज़-ए-जुमा अदा किया जो पहले से इंतेजामिया कमिटी के‌ तहत मस्जिदों‌ में‌ थे। जबकि आम मुसलमान नमाजियों ने सरकार‌ गाइडलेंस और धर्मगुरुओं की बातों को मानते हुये अपने-अपने घरों में नमाज अदा किया। मस्जिद-ए-हमज़ा के इमाम मुफ़्ती एमन बारी ने इस बाबत बताया कि इस्लाम में जुमे को अफजल बताया गया है. हर मुसलमान मस्जिदों में जुमे की नमाज़ ज़रूर अदा करता है‌ जहां आम दिनों के मुक़ाबले कई गुणा अधिक भीड़ होती है मगर देश के इतिहास में आज पहली ऐसी जुमा है,‌जब हिंदुस्तानी मुसलमान मस्जिदों में आज कम सँख्या में नमाज़ अदा किया है. साथ ही उन्होंने कहा कि इस्लाम में अपने आपको हलाकत में डालने का अल्लाह हुक्म नहीं दिया है और इंसानी जिंदगी को अहम बताया गया है इसलिये इस तरह के‌‌ किसी कठिन परस्थितियों जुमे की नमाज़ घर में पढ़ा जा सकता हैं. शरीयत में इसकी रियायत है.