आईसोलेशन (एकांत वास) और सैनिटाइजर के परिपेक्ष में

आईसोलेशन अर्थार्त एकांत वास के द्वारा इश्वर (अल्लाह) से रिश्ता मजबूत किया जा सकता है आईसोलेशन का एतिहासिक मह्त्व भी है ऋषि मुनियों ने एकांत वास में इश्वर की प्रार्थना और आराधना करके अलौकिक शक्ति प्राप्त की थी l पैगंबर ए इस्लाम हजरत मों. स. अ. एकांत वास में रहे l गारे हेरा में तपस्या के बाद उन्हें अल्लाह ने आखिरी पैगंबर बनाया और कुरान की पहली आयत भी एकांत वास गारे हेरा में आई सेल्फ आईसोलेश न में बहुत बड़ी शक्ति है एकांत वास मे ही रहकर मनुष्य ईश्वर से करीब हो सकता है और ईश्वर की कृपा का पात्र हो सकता है इस वक़्त पूरा विश्व महामारी के चपेट में है लोगों को फेस मास्क और सैनिटाइजर के उपयोग के बारे में बताया जा रहा है लेकिन इसका उपयोग करने वाला पूर्ण रूप से सावधानी बरतें अर्थात्‌ अपने चेहरे को हाथ न लगाएं l कोई भी खाद्यान वस्तु सेवन करने से पूर्व हाथ अच्छी तरह धोए, दूसरे लोगों से गले मिलने या हाथ मिलाने से पूर्ण रूप से बचे l
सोशल डिस्टेंसिंग यानी समाजी दूरी बनाए रखने के लिए हर संभव स्वयं को आईसोलेट कर ले लेकिन अगर लोगों ने सावधानियां नहीं बरती तो फिर चाहे स्टील का मास्क ही क्यों न पहन ले, वायरस हमारे शरीर के हर एक सूराख से अंदर प्रवेश कर जाएगा अल्लाह हम लोगों की हिफाजत फरमाएं ये सब हमारे दुष्कर्मों का परिणाम है ये कहर ए इलाही, अजाब ए इलाही है अभी तक इसके ईलाज की दवा नहीं है ये लाईलाज मर्ज है इसलिए हम अपना अधिक समय अल्लाह के इबादत में व्यतीत करे अपने गुनाहों से तौबा करे वो बहुत बड़ा रहीम करीम और गफूर रूर रहीम है वो हमारे गुनाहों को जरूर माफ करेगा और कोरोंना जैसी वबा से हम लोगों को मुक्ति मिलेगी आमीन सम्मा आमीन, या रब्बुल आलमिन इंशाअल्लाहु र रहमानिर्रहिम पूर्ण रूप से सचेत रहना अक्लमंदी है, रुक जाना ठहर जाना और एकांत वास और आईसोलेशन मे ही बेहतरी है l
अशरफ अस्थानवी