शबे-बराअत में अपने घरों में रहकर ही इबादत करें। जमीयत उलेमा ए हिंद की मुसलमानों से अपील।

नई दिल्ली 6 अप्रैल
जमीयत उलेमा ए हिंद के महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने शबे-बरात के अवसर पर सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने की अपील की है और सारे मुसलमानों का ध्यान आकर्षित किया है कि इस अवसर पर अपने घरों में रहकर ही इबादत और कुरान मजीद की तिलावत करें। शबे-बरात में इबादत करना सवाब का काम है और इसकी विशेष महत्ता है। नफली इबादत जितनी अधिक हो सके वह इस रात में अंजाम दें। ज़िक्र करें। तसबीह पढ़ें। दुआएं करें और अपने गुज़र चुके रिश्तेदारों को सवाब पहुंचाने का एहतमाम करें। यह सारी इबादतें घर पर रहकर बेहतर तरीके से अंजाम दी जा सकती हैं। कब्रिस्तान जाने के सिलसिले में भी फुकहा (इस्लामिक स्कॉलर्स) की राय है कि हर शबे बरात में जाने का एहतमाम करना जरूरी नहीं है। इस रात में आम हालात में भी घरों से बाहर निकलना, देर रात सड़क पर हंगामा करना, गाड़ियां घूमना, शरीयत और कानून के खिलाफ़ है।अब जब कोरोना वायरस से पैदा वर्तमान स्थितियों में, जिनमें मानवीय जिंदगी की सुरक्षा के लिए, सामाजिक दूरी, घरों में रहने के दिशा निर्देश दिए गए हैं। ऐसा कोई भी कार्य या अमल करना और अधिक गलत और शरीयत के विरुद्ध और कानूनी जुर्म होगा।
स्वास्थ्य विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार यह बीमारी एक दूसरे के निकट रहने, मुसाफा(हाथ मिलाना ) करने, यहां तक कि किसी चीज़ को छूने और फिर छुई हुई चीज़ को दूसरे व्यक्ति के छूने के कारण से भी फैलती है। जहां लोगों का समूह हो वहां तेज़ी से इसके फैलने की शंका है। ऐसी स्थिति में इबादत की महत्ता और मानवीय जीवन की सुरक्षा के संबंध में शरई निर्देशों को सामने रखते हुए अपील की जाती है कि :
( 1) शबे -बराअत के अवसर पर अपने घरों से बाहर न निकलें बल्कि अपने घरों में नमाज़ और दूसरी इबादतों में खुद को लगाए रखें।
(2) गाड़ी पर सवार होकर सड़क पर न घूमें और न ही आतिशबाजी जैसे शरीयत के खिलाफ कार्यों में लिप्त हों।
( 3) कब्रिस्तान जाने के बजाय अपने दुनिया से चले गए परिवारजनों, रिश्तेदारों के लिए, घरों में रहकर ही सवाब पहुंचाने का कार्य करें।
(4) इस रात में भी मस्जिदों में फर्ज़ नमाज़ की अदायगी के लिए न जाएं बल्कि अपने घरों में रहकर सभी नमाज़ अदा करें।
(5) हर व्यक्ति अपने स्थान पर तौबा- इस्तिग़फ़ार, इबादत, दुआएँ अवश्य करे। इन क्षणों को बेकार में नष्ट करने के बजाए लोगों की भलाई और जनसेवा के कामों में लगाया जाए।
( 6) सदका, खैरात (अल्लाह की राह में दान) का प्रबंध किया जाए। मोहल्ला और पड़ोस में मौजूद गरीब और आर्थिक तौर पर परेशान लोगों की मदद का विशेष ध्यान रखा जाए।
( 7) तहज्जुद का एहतमाम करें और अल्लाह से रो रो कर माफी मांगे। देश और कौम की भलाई और इस कोरोना महामारी से छुटकारे के लिए विशेष दुआ करें।
(8) मस्जिद के इमाम, क्षेत्र के जिम्मेदार लोग और जमीयत उलेमा के स्थानीय पदाधिकारियों से गुजारिश है कि वह अपने-अपने क्षेत्रों में विशेषकर नौजवानों का ध्यान इस ओर आकर्षित करें कि वह अपने-अपने घरों में रहें और सड़क आदि पर न घूमें।