गणतंत्र दिवस परेड में बनेगा इतिहास, फ्रांस सेना भी करेगी कदमताल

गणतंत्र दिवस परेड में बनेगा इतिहास, फ्रांस सेना भी करेगी कदमताल

नई दिल्ली : गणतंत्र दिवस परेड के इतिहास में पहली बार इस साल फ्रांस की सेना की एक टुकड़ी भारत की सेना के साथ कदमताल करती दिखाई देंगी. ये पहली बार होगा कि कोई विदेशी सेना गणतंत्र दिवस परेड में हिस्सा लेगी. रक्षा मंत्रालय के एक बड़े अधिकारी ने एबीपी न्यूज को बताया कि फ्रांसीसी सेना की टुकड़ी भारत भी पहुंच चुकी है.

पहले ये टुकड़ी भारतीय सेना के साथ साझा-युद्धभ्यास शक्ति-2016 में भाग लेगी और उसके बाद परेड में हिस्सा लेगी. गौरतलब है कि फ्रांस के राष्ट्रपति ओलांड इस साल की गणतंण दिवस परे़ड के मुख्य-अतिथि भी हैं. इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच में रफाल लड़ाकू विमान सहित कई महत्वपूर्ण सामरिक समझौते होने की उम्मीद है.

जानकारों के मुताबिक, ये दोनों देशों की मिलेट्री-सहयोग का हिस्सा तो है ही साथ ही आंतकवाद के खिलाफ साझा प्रतिरोध का सूचक भी है. दोनों ही देश आतंकवाद से ग्रस्त रहे हैं. अगर भारत में हाल ही में पठानकोट एयरबेस पर आतंकी हमला हुआ तो फ्रांस की राजधानी पेरिस में में कुछ समय पहले ही बड़ा आतंकी हमला हुआ था.

हाल ही में भारतीय सेना की एक टुकड़ी मास्को में रुस के विजय-दिवस में शामिल हुई थी. लेकिन ये पहली बार है कि एक विदेशी सेना की टुकड़ी राजपथ पर मार्च-पास्ट करती दिखाई पड़ेगी.

शक्ति-2016 :

भारत और फ्रांस के बीच साझा युद्धभ्यास ‘शक्ति-2016’ शुक्रवार से राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिग में शुरू हो गया है. इस युद्धभ्यास का मुख्य उद्देश्य एंटी-टेरेरिस्ट स्किल में एक-दूसरे की सेना के ऑपरेशनल अनुभव को साझा करना है. 16 जनवरी तक चलने वाले इस नौ दिवसीय इस अभ्यास मे फ्रांस की 7वी आरमर्ड ब्रिगेड की 35वी इंफंट्री रेजीमेंट का 56 सदस्य दल भारत पहुंच गया है.

भारत की तरफ से गढ़वाल राईफल्स इस मिलेट्री-एक्सरसाइज मे हिस्सा ले रही है. फ्रांस की 35वी इंफंट्री रेजीमेंट 1604 में बनी थी और हाल में अफगानिस्तान, ईराक और अलजीरिया सहित अफ्रीका के कई देशों में आतंक-विरोधी अभियान मे शामिल है. भारत की सेना को भी आतंक-प्रभावित इलाकों में तैनात रहने का लंबा अनुभव है.

अगर भारत में हाल ही मे पठानकोट एयरबेस पर आतंकियों ने हमला किया था तो फ्रांस की राजधानी में भी हाल ही में एक बड़ा आतंकी हमला हुआ था. इस साझा युद्धभ्यास का मुख्य उद्देश्य गांव व शहरी इलाकों में आतंकवाद को पूरी तरह से खत्म करने में महारत हासिल करना है. इस अभ्यास के दौरान फायरिंग, सामरिक-संचालन और हेली-बोर्न ऑपरेशन का कठिन प्रशिक्षण किया जायेगा. भारत और फ्रांस की सेना के बीच ये तीसरा साझा युद्धभ्यास है.