लॉकडाउन का करें पालन तभी कोरोना से जीतेगा इंडिया: सुलेमान बैदावी

 

आमस/गया

कोरोना एक महामारी।
चीन के वुहान शहर से फैली यह बीमारी न जाने कब थमेगी। यह पूरे विश्व में भयंकर विपदा में लाकर खड़ी कर दी है। देश की आर्थिक व्यवस्था चरमरा गई है। पूरे विश्व के कई डॉक्टर इसके उपचार की औषधि की खोज में लगे है।

ऐसे में मनोविज्ञानियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। मगर सवाल इससे अलग है कि कोरोना की जांच, कवारेंटाईन और आइसोलेशन का जिक्र आते ही लोग डर क्यूं जाते है ? कहीं कोरोना के प्रचार प्रसार का तरीका से बढ़ती हीनभावना समाज को तनावग्रस्त तो नहीं बना रही है? कोरोना वायरस के इलाज के साथ ही सामाजिक मनोविज्ञान को भी समझना जरूरी है, ताकि वायरस के रोकथाम में हम मदद कर सके।

जब तक कोई उपचार नहीं मिल जाता तब तक अपने अपने घरों में रह कर बचा जा सकता है। भारत सरकार ने भी लॉकडॉउन लागू कर रखा है। एक बेहतर भविष्य के लिए आज अगर कुछ सहन करना भी पड़े तो जनता को सरकार का सहयोग करना चाहिए। देखा जाए तो समस्यायें कई है – लेकिन जीवित रहने पर ही हम घर परिवार के लिए कमा पाएंगे और उनके काम आ सकेंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि व्यक्ति से ही परिवार, परिवार से समाज और समाज से देश बनता है !!

– सुलेमान बैदावी ✍️