माहे रमजान एक बाबरकत महीना है!

 

आमस/गया

रमजान का महीना मुसलमानाे के लिए ऱहमताें व बरकताें का महीना है।
ये महीना अमल व जददाे जुहद का महीना है। ये इबादत गुजाराें के लिए खेती का महीना है अाैर दिलों काे फसाद से पाक करने का महीना है।

जब रमजान का महीना आता है ताे मोमीन बड़ा ख़ुश हाे जाता है। नमाज़ व तिलावत-ए- क़ुरआन, ज़िक्र व अज़कार में मशगुल हो जाता है।

ये बातें आमस प्रखण्ड के सिमरी निवासी मैलाना मो० एकराम कासीमी ने फरमाया है। वह आगे फरमाते हैं की बडे ही खुशनसीब हैं वे लोग जो इस माहे-ए- रमजान को सिद्क़ दिल से ताजीमो तकरीम करके अपने रब को राजी व ख़ुश करने की कोशिश करता है। अौर अल्लाह की मग़फ़िरत हासिल करके जहन्नुम से छुटकारा पाने के लिए जयादा से जयादा सवाब हासिल करता है। फ़िलवक्त कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया को बेबस कर रखा है। आम मुसलमानों के लिए अल्लाह का घर यानी मस्जिद का दरवाज़ा बंद हो चुका है। लेकिन रमज़ान बाबरकत महीना है। इसलिए रहमत का दरवाज़ा हर वक़्त खुला हुआ है। तमाम मुसलमानों से गुज़ारिश है कि ऐसे हालात में अपने घरों में रहकर ही इबादत करें और साथ ही मुल्क़ हिंदुस्तान से कोरोना के खात्मे के लिए खास दुआ का एहतेमाम करें।

मौलाना मो० एकराम कासीमी, सिमरी, आमस, गया