15 दिनों से सफर में हैं 15 प्रवासी मज़दूर, घर है आख़री मंज़िल

 

आमस/गया

देशव्यापी लॉक डाउन के बाद दिहाड़ी मजदूरों के समक्ष तरह तरह की समस्यायें उत्तपन्न हुई है। कोई एक समय भोजन के लिए परेशान है तो कोई अपनों से हज़ारों किलोमीटर दूर घर जाने को मजबूर है। प्रवासी मजदूरों का काम महीनों से बंद होने के कारण उन्हें अनेकों मजबूरियों झेलनी पड़ रही है। जिसमें भोजन और सकुशल घर पहुँचना मुख्य समस्या बन गया है। परंतु महीनों से काम बंद होने के बाद अब रुपये की काफी किल्लत हो गई है। जिसके कारण न तो ढंग का भोजन कर पा रहे हैं और न ही शारीरिक परेशानी होने पर उसका इलाज करा पा रहे हैं। कुछ ऐसा ही दर्द समेटे प्रवासी मजदूरों का एक टोली आमस के जीटी रोड से होते हुए शनिवार को गुज़रा। टोली में शामिल सुरेश चंद, बच्चा लाल, राधेश्याम, विनय कुमार, लाल चंद, जवाहर लाल, श्याम बहादुर सहित पन्द्रह मजदूरों में अपनी आप बीती सुनाई। बताया की लॉक डाउन लगने के बाद से ही हमलोगों का काम बंद हो गया। एक महीने से एक कमरे में किसी तरह दिन काट रहे थे। परंतु लॉक डाउन की सीमा बढ़ती जा रही है और हमारा ठेकेदार भी लॉक डाउन में अपने घर पर फंसा हुआ है। जिसके कारण खाने के लाले पड़ गए। अब एक ही सहारा है किसी भी हालत में घर पहुंचना। वहीं टोली में शामिल राम बहादुर ने अपने पेट पर हाथ फेरते हुए बताया कि बीते दिनों से पेट में दर्द है। परन्तु पैसे की बेबसी का आलम ये है कि पेट दर्द को भुलाकर हज़ारो किलोमीटर की दूरी रोजाना तय कर रहे हैं। यहाँ बता दें कि सभी प्रवासी मजदूर पन्द्रह दिनों से साईकल के सहारे बंगाल के वर्दवान आ रहे हैं जिन्हें अल्लाहाबाद जाना है।