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हिंसा, असहिष्णुता, अविवेकपूर्ण ताकतों से खुद की रक्षा करनी होगी : राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी

हिंसा, असहिष्णुता, अविवेकपूर्ण ताकतों से खुद की रक्षा करनी होगी : राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी

यी दिल्ली : राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने आज राष्ट्र को आगाह किया कि हमें हिंसा, असहिष्णुता और अविवेकपूर्ण ताकतों से स्वयं की रक्षा करनी होगी .

देश में इन दिनों असहिष्णुता के मुद्दे पर चल रही चर्चा के बीच राष्ट्रपति ने 67वें गणतंत्र दिवस की पूर्वसंध्या पर राष्ट्र के नाम अपने संदेश में यह चेतावनी दी, ‘‘अतीत के प्रति सम्मान राष्ट्रीयता का एक आवश्यक पहलू है. हमारी उत्कृष्ट विरासत, लोकतंत्र की संस्थाएं सभी नागरिकों के लिए न्याय, समानता तथा लैंगिक और आर्थिक समता सुनिश्चित करती है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘जब हिंसा की घृणित घटनाएं इन स्थापित आदर्श, जो हमारी राष्ट्रीयता के मूल तत्व हैं, पर चोट करती हैं तो उन पर उसी समय ध्यान देना होगा . हमें हिंसा, असहिष्णुता और अविवेकपूर्ण ताकतों से स्वयं की रक्षा करनी होगी .’’ प्रणब ने कहा कि हमारे बीच अकसर संदेहवादी और आलोचक होंगे . हमें शिकायत, मांग, विरोध करते रहना चाहिए . यह भी लोकतंत्र की एक विशेषता है. परन्तु हमारे लोकतंत्र ने जो हासिल किया है, हमें उसकी भी सराहना करनी चाहिए .

उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचे, विनिर्माण, स्वास्थ्य, शिक्षा विज्ञान और प्रौद्योगिकी में निवेश से हम और अधिक विकास दर प्राप्त करने की स्थिति में है जिससे हमें अगले दस से 15 सालों में गरीबी मिटाने में मदद मिलेगी .

राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘विवेकपूर्ण चेतना और हमारे नैतिक जगत का प्रमुख उद्देश्य शांति है . यह सदस्यता की बुनियादी और आर्थिक प्रगति की जरूरत है. परंतु हम कभी भी यह छोटा सा सवाल नहीं पूछ पाए हैं कि शांति प्राप्त करना इतना दूर क्यों है ? टकराव को समाप्त करने से अधिक शांति स्थापित करना इतना कठिन क्यों हो रहा है ? ’’