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गंभीर हालात: एक ऐसा शहर जहां पानी के लिए लोग दर-दर भटक रहे हैं

नई दिल्ली स्टार न्यूज़.टुडे(एबीपी न्यूज )-: मुंबई से करीब 500 किलोमीटर दूर महाराष्ट्र का लातूर शहर पानी को तरस रहा है. हालत ये है कि बाहर से आए छात्रों को पानी की कमी की वजह से घर भेजने के लिए प्रशासन ने स्कूलों में एक महीने पहले ही पहले परीक्षा कराई जा रही है.

एक ऐसा शहर, जहां एक महीने से नल को पानी नहीं आया. एक ऐसा शहर जहां पानी की कमी की वजह से प्रशासन की बाहर से पढ़ने आए छात्रों को परीक्षा होने के बाद शहर छोड़ने की अपील, 5 लाख से ज्यादा लोगों की पानी के लिये रोजाना जद्दोजहद, एक ऐसा शहर जहां पानी की कमी की वजह से बडे उद्योगधंदे हो रहे है बंद, एक ऐसा शहर जहां पानी के लिए लोग दर दर भटक रहे हैं, ये कहानी महाराष्ट्र के लातूर की है.

कहते हैं जल है तो जीवन है और जल नहीं तो जीवन नहीं. कुछ ऐसे ही हालातों से गुजर रहा है महाराष्ट्र का लातूर शहर. मराठवाडा का एक बडा शहर लातूर, ये शहर उसके 100 साल के इतिहास मे अब तक की सबसे बडे पानी की समस्या से जुझ रहा है. सुखे का ऐसा कहर इस शहर ने अब तक नहीं देखा था. इस शहर में उभरे इन मुश्किल हालात के बारे में जानने से पहले इस शहर के बारे में जान लीजिये. ये देश की सबसे बड़ी दाल की मंडियों में से एक है. देश में तूर दाल के भाव अमुमन यहीं तय होतें हैं.

पढाई के साथ ही स्कूलों में 9 वीं क्लास का इम्तिहान हो रहा है. अमुमन ये इम्तिहान हर साल अप्रैल महिने में होता है, लेकिन इस साल ये एक महीना पहले हो रहा है, वजह है सुखा, पानी की भीषण समस्या.

लातूर के यशवंत विद्यालय की प्रिंसिपल डॉ सुवर्णा जाधव ने कहा कि 29 तारीख को बैठक हुई थी कलेक्टर और शिक्षण अधिकारी की तब निर्देश दिये, इसीलिए हम एक महिना पहले एग्जाम ले रहे हैं.
लातूर महानगर पालिका के कमिश्नर सुधाकर तेलंग बताते हैं कि लातूर एजुकेशन का हब है, यहां 9 क्लास तक 1 लाख 10 हजार छात्र है. हमने उनको रिक्वेस्ट किया है.

प्रशासन को उम्मीद है कि छात्रों के लातूर से बाहर जानेसे शहर से करीब 50 हजार से ज्यादा लोगों का बोझ कम हो जायेगा. इस शहर की आबादी करीब साडे 5 लाख है और लोगों को देने के लिये प्रशासन के पास पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं है.

दरअसल मांजरा डैम का पानी खत्म हो चुका है. डैम में गढ़ढे खोदकर शहर के पानी की प्यास बुझाने की कोशिश हो रही है, लेकिन डैम का पानी खत्म होने से शहर को पीने का पानी नहीं मिल रहा और यहां के लोग पानी के लिये दर दर भटक रहे हैं.

जहां पीने के पानी की इतनी दिक्कत हो आप सोचिये वहा उद्योग धंदो को कहां से पानी मिलेगा.