राष्ट्रीय सहारा के सीनियर व मशहूर पत्रकार अबदुल क़ादिर शम्स की कोरोना से दिल्ली में मौत

 

कोरोना ने आज एक और बहुमुखी प्रतिभा के मालिक अबदुल क़ादिर शम्स को मौत की नींद सुला दिया. शम्स एक कुशल पत्रकार के साथ साहित्यकार भी थे. उनकी एक पुस्तक भी प्रकाशित हो चुकी है, दिल्ली और दिल्ली के बाहर भी सेमीनार में आदर व सम्मान के साथ बुलाए जाते थे. ख़ुद मुझे दिल्ली के कयी सेमीनार में उनके साथ मंच साझा करने का अवसर मिला है.

शम्स अररिया, बिहार के निवासी थे और पिछले 25 वर्ष से दिल्ली में रह रहे थे. आरंभ में ” मिल्ली इत्तेहाद ” नामी उर्दू मासिक में सहायक संपादक थे, उसके बाद ” राष्ट्रीय सहारा ” उर्दू दैनिक से जुड़ गए और अब तक वहीं कार्यरत थे.

शम्स एक सामाजिक संस्था के भी प्रमुख थे, जिस के द्वारा सामाजिक कार्य करते रहते थे. भविष्य में अररिया से भी चुनाव लड़ने की इच्छा रखते थे. मुझ से दो तीन बार इस विषय पर चर्चा भी कर चुके थे. उनमें चुनाव लड़ने के गुण थे और वो ज़िंदा रहते तो ज़रूर चुनाव लड़ते, इस इच्छा के कारण अररिया और सीमांचल उनका आना जाना लगा रहता था.

शम्स जब भी मिलते हंसते हुए मिलते, उनके बहुत से मित्रों का खयाल है कि वो सीधे सादे इंसान थे. उन्होंने ने जामिया मिल्लिया इसलामिया विश्वविद्यालय, दिल्ली से पीएचडी की उपाधि भी हासिल की थी. जिंदगी ने मोहलत नहीं दी वरना जिंदगी के कयी क्षेत्र में उनसे बड़े योगदान की उम्मीद थी.

( डॉ. बिस्मिल आरिफ़ी )