मुस्कान फाउंडेशन ने दो अनाथ बहनों मैट्रिक तक की पढ़ाई का उठाया जिम्मा, दिया कपड़ा, स्टडी मटेरियल और बैग

  ◆ बेटी कुसुम को जन्म देकर दुनिया को अलविदा कह गई माँ ◆ …और ढाई माह पूर्व भीषण सड़क हादसे में पिता की हो गई मौत आमस आमस में बीते ढाई माह पूर्व एक भीषण सड़क हादसे में एक ही गांव के 9 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी। इस हादसे ने प्रखण्ड के रेंगनिया गांव स्थित खैरा टोला को झकझोर कर रख दिया था। किसी ने अपने पति को खोया तो कोई अपने पिता को खो दिया। उसी में में शामिल है महादलित टोले की दो बहन सुषमा (11) और कुसुम (4)। इस घटना के बाद ये दोनों बहनें अनाथ हो गई है। चार साल पूर्व माँ मूनवा देवी अपनी बेटी कुसुम को जन्म देने कर तुरन्त बाद दुनिया को छोड़ गई और अब बीते 15 जून को इलाके के बिशुनपुर मोड़ के समीप सड़क हादसे में पिता प्रेमन मांझी की भी मौत हो गई। जिसके बाद से उक्त दोनों बहनें अनाथ हो गई। बेबस अनाथ बहनों को ज़िंदगी की बाधाओं और शिक्षा ग्रहण करने में आनेवाली परेशानियों को दूर करने के लिए रविवार मुस्कान फाउंडेशन की टीम उसके घर पहुँची और दोनों बहनों को कपड़ा, स्कूली बैग, स्टडी मटेरियल, मास्क, साबुन और आर्थिक सहयोग दिया। संस्था के फाउंडर इमरोज़ अली ने बताया कि दोनों बहनों को मैट्रिक तक कि शिक्षा का खर्च मुस्कान फाउंडेशन उठायेगी। ताकि दोनों बहनें शिक्षित होकर जागरूक एवं आत्मनिर्भर बन सकेगी। साथ ही बताया की बड़ी बहन सुषमा को 9वीं कक्षा में नामांकन कराया गया है और छोटी बहन कुसुम फिलहाल आंगनबाड़ी केंद्र में शिक्षा ले सकेगी। वहीं सुषमा की चाची सिसकते हुए बताती हैं कि भतीजी कुसुम को अपनी माँ का दूध भी नसीब नहीं हुआ था और पिता भी नहीं रहे। हम दोनों का देखभाल कर रहे हैं। श्री इमरोज़ ने बताया कि इस सहयोग कार्य में संस्थापक सदस्य हिफज़ूर रहमान रिंकू, रितेश कुमार, जमशेद अशरफ, जावेद कलामी और समाजसेवी रौशन गुप्ता का अहम भूमिका रही। मौके पर शिक्षक अनूप कुमार और ज्ञानती कुमारी भी मौजूद रहे।