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माननीय “प्रधान सेवक”उर्फ़ प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी जी!

माननीय “प्रधान सेवक”उर्फ़ प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी जी!

“मेहदी हसन एैनी का़समी”
मैं भारत का एक साधारण सा आदमी हूं, एक युवा हूं ,
मध्यम परिवार (मिडिल क्लास फैमिली ) से आता हूं
और आप की बातों व कार्य शैली से प्रभावित था, लेकिन अब मेरा आप पर से विश्वास डगमगा सा रहा है. मुझे लगता है
आप सिर्फ बातें ही कर रहे हैं . कोई भी ऐसा ज़मीनी
काम आप ने नहीं किया है जिस से मिडिल क्लास
लोगों का भला हो सके, जबकि  यहीं तबका है जिसने आपको वोट देकर देश का प्रधानमंत्री बनाया है.
आप जिस बहूमत और विकास के दावों के साथ देश के सब से बडे़ पद पर आसीन हुए थे.आप से जनता ने बडी़ उम्मीदें लगा ली थीं.लाल कि़ले से आप के द्वारा दिये गये पहले भाषण के बोल आज तक हमारे कानों में गूंजते हैं.

दिमाग़ कहता है उसे जुमला समझो!
पर दिल है कि अब भी मानता नही!

प्रधान सेवक जी!

देश की आर्थिक स्थिति आप के सामने है.देश के किसान हजा़रों करोड़ रुपये के कर्ज़ तले दबे हुए हैं!
11 प्रदेश सूखे से पीडि़त हैं!
महंगाई आसमान छू रही है!मुद्रा की स्थिति भी बहूत नाज़ुक है.
मिनरल वाटर से लेकर रसोई गैस तक,दाल से लेकर चीनी तक की की़मत अब सोने से कम नही़ है!
एैसे में,आपकी सरकार देश के ग़रीबों,किसानों की गाढ़ी कमाई को वसूल करके कारपोरेट जगत पर मेहरबान हो रही है!
वो गौतम अडानी जिस पर सरकारी खजा़ने के  72 हजा़र करोड़ रूपये पहले से कर्ज़ है!
आप की हुकूमत आने के बाद से अब तक उसे 1अरब
डालर रूपये कर्ज़ दिये जा चुके हैं!
और अभी कल आप की किसान समर्पित सरकार ने अडानी ग्रूप के 200 करोड़ रूपये माफ़ कर दिय हैं!एैसा किस नियम के तहत किया गया हमें मालूम नहीं पर यह ख़बर कर्ज़ में डूबे किसानों के लिए जान लेवा साबित हुई है.

मोदी जी!

आपको पूर्ण बहुमत मिलने में आपका बहुत बड़ा योगदान हो ऐसा नही है. ठीक है की आपका गुजरात मॉडल लोगों को आकर्षित करता है, इस गुजरात मॉडल ने लोगों में एक आशा का
संचार किया मगर कांग्रेस के ताबूत में आखिरी कील निःसंदेह आम आदमी के महंगाई, घोटालों, भर्ष्टाचार से उतपन्न आक्रोश ने ही ठोकी थी.
आपकी जीत  दरअसल आपसे आशा और कांग्रेस के खिलाफ व्यापकआक्रोश का परिणाम था, इसी लिए आपकी सरकार को ज्यादा खुशफहमी ना पालकर लोगों की भलाई के लिए ठोस व सार्थक कदम उठाने शुरू कर देने चाहिए थे।
पर प्रधान मंत्री जी एैसा नहीं हुआ, बल्कि आप के बड़े बड़े मंत्री बयान बाजी़ में लग गये!आप विदेश  यात्रा पर निकल गये!बाहर आपके जुमले खूब सुनने को मिलते हैं!पर देश में आए दिन घटित मुददों पर आप की चुप्पी को हम क्या समझें.
हम आप को  बार बार यह कहते हुए  सुन चुके हैं
की अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए कठोर फैसले लेने की जरूरत है जरूर लीजिये कठोर फैसले। मगर ये कठोर फैसले आम आदमी पर और रोजमर्रा की जरूरतों पर लागू ना करके हिन्दुस्तान के उन मुठ्ठी भर लोगों पर लागू करें.
जो भारत की अकूत धन सम्पदा का आधा हिस्सा दबाये बैठे हैं.कठोर क़दम उठाइये अंबानी व अडानी जैसे लोगों पर जो देश को खोखला करने पर तुले हुए हैं!वरना कहीं यह भी विजय माल्या की  तरह आप को उंगली दिखाकर चल पडे़ तो देश का तो दिवालिया निकल जाएगा!
आप का तो कुछ नही़ बिगडेगा क्योंकि पांच लाख का जोड़ा आप को हर दिन पांच मरतबा अब भी  पहनने को, मिलता है तब भी मिलेगा!
पर सोचिये उस किसान के बारे में जो पैसे ना होने की वजह से खाट में खुद बैल की तरह नथ कर अपना खेत जोतता है!
उस ग़रीब बच्चे के बारे में सोचिये जो ग़रीबी की वजह से स्कूल से अंडा चुरा कर अपनी मां के लिए ले जाता
है.
श्री मोदी जी!
आप राष्ट्रपति के इफ़तार पार्टी में ना जाएं!
सर पर टोपी भी ना लगाएं!कोई ज़रूरत नहीं दिल में संघ और बाहर सब के संग चलने की!
और अपने चुनावी वादों पर अमल की भी ज़रूरत नहीं है.
क्योंकि आप ही ने कहा था की वो सब चुनावी बातें थीं.
पर एक प्रधान मंत्री होते हुए आप के जो कृतव्य हैं आप उनका तो पालन करिए.
देश को लुटने से बचाइए!यहां की आर्थिक स्थिति पर तवज्जो दीजिए!
महंगाई पर विराम लगाइए!किसानों को आत्महत्या से बचाइए!
हम देश वासियों को ना तो DIGITAL INDIA की ज़रूरत है,ना NSG में आने की.
हमें तो एक एैसा देश चाहिए जहां का हर व्यक्ति रात में बर पेट खाना खाकर सोए! और जहां सभी देश वासी मिल जुलकर प्यार से रहें.

आदारणीय प्रधान मंत्री जी!

कारपोरेट जगत ने आप के साथ चुनाव में जितना इहसान किया था आप की सरकार ने इन दो सालों में उसका बदला चुकता कर दिया है!
अब आप सख़्त क़दम उठाईए!कुछ दिन हमारे देश भारत में रुकिए!और इन कर्ज़ माफियाओं से सरकारी रक़म वसूल करके जनता का भला करिए.
आप के पास बहुमत है.आप कर सकते हैं
बस कर गुज़रिए.क्योंकि देश की 125 करोड़ जनता आप से अब भी आशा लगाए बैठी है.
  इस आशा को निराशा में ना बदलिए.

आप के संग अपने मन की बात साझा करने वाला

“एक साधारण नागरिक”