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यही विडंबना है कि रहबर व रहज़न तै करने वाले खुद ही…………

यही विडंबना है कि रहबर व रहज़न तै  करने वाले खुद ही…………

मेहदी हसन एैनी का़समी के क़लम से

बचपन से भारत की एकता व अखंडता की बात
सुनता आया हुँ,मेरे बडों ने बताया कि भारत अकेला एैसा देश है जहाँ के लेकतंत्र की जडें चट्टान से भी मज़बूत हैं,
मेरे अध्यापकोॆ ने हमें पढ़ाया कि हमारे देश में अपनी बात रखनी की जितनी सव्तंत्रता है दुनिया के किसी देश में नहीं,
इन्हीं सब की वजह से मैं सीना ठोंक कर, हाथ में झण्डा लेकर,दिल में एक सच्चे देश प्रेमी होने का जज़्बा लेकर फ़ख्र से कहता हुआ आया हूँ कि मैं भारतीय हुँ,बाबा साहब का नाम जपते ना थकता था.
पर ये क्या होश संभाला तो जिस भारत को पाया ,ना तो उसमें लोकतंत्र की मज़बूती पायी,ना ही राये रखने की सव्तंत्रता दिखी.बाबा साहब के देश को यह क्या हो गया, बाबा साहब ने संविधान को पारित कराने के लिए संसद में जो स्पीच दी थी उस के बोल और आज
का भारत आसमान ज़मीन का फरक़ रखता है,आज के भारत पर लोकतंत्र व प्रजातंत्र का नहीं भगवा ब्रिगेड का राज हो गया है.मीडिया और जांच एजेंसियों की मिली भगत से आज के भारत में आतंकवाद को इसलाम और आतंकवादी को मुसलमान बनाया जा रहा है, रात सोने वाला एक वफ़ादार,देश भक्त और देश प्रेमी मुसलमान सुबह को आतंकवादी,देशद्रोही
और इंसान दुश्मन बना दिया जाता है. एैसा ही कुछ इन दिनों अमन के दूत महान इसलामी स्कालर डा़ जा़किर नाईक के साथ हो रहा है,
सारी दुनिया में अपनी तार्किक इसलामी स्पीच से मशहूर जा़किर नाइक जिनके चाहने वालों की संख्या करोड़ों में है,और सबसे ज़्यादा उन के फालोवर बंगलादेश में है,ढाका एटैक के मुजरिमों द्वारा जा़किर नाइक से प्रेरित होने की बात कहने पर भारतीय मीडिया,जांच एजेंसियाँ और कट्टरवाद सरकार हाथ धो कर पीछे पड़ गयी है,वो जा़किर नाइक जिन्हें दुनियां के कई बड़े देशों द्वारा शांति दूत का अवार्ड दिया गया आज भारतीय मीडिया महज़ एक आतंकी के उन्हें सोशल मीडिया पर फालो करने और उनकेे भाषण सुनने की वजह से आतंकियों का गुरू साबित कर रही है,मीडिया के द्वारा जिस भाषण को तोड़ मरोड़ कर एक झूँठी रिपोर्ट को बना ये दावा किया जा रहा कि
डॉ जाकिर नाइक, अपने भाषण में मुसलमानों को “आतंकवादी बनने के लिए” कह रहे हैं , इस मुद्दे पर डॉ जाकिर नाइक के भाषण का वास्तविक संस्करण प्रस्तुत किया जा रहा है…
“एक आतंकवादी एक व्यक्ति जो आतंक का कारण बनता है।जब एक डाकू किसी पुलिस वाले को देखता है तो वह डरता है।एक पुलिस वाला डाकू के लिए एक आतंकवादी है। इसी तरह हर मुसलमान एक समाज, जैसे चोरों, डकैतों और बलात्कारियों के असामाजिक तत्वों के लिए आतंकवादी होना चाहिए। जब भी ऐसी कोई असामाजिक तत्व को एक मुस्लिम देखता है, तो वह डर होना चाहिए। यह शब्द ‘आतंकवादी’ आम तौर पर एक व्यक्ति आम लोगों के बीच आतंक का कारण बनता है के लिए उपयोग किया जाता है ।
लेकिन एक सच्चा मुसलमान केवल एक चयनात्मक लोगों यानी असामाजिक तत्वों के लिए आतंकवादी होना चाहिए न कि निर्दोषों के लिये , वास्तव में एक मुस्लिम निर्दोष लोगों के लिए शांति का एक स्रोत होना
चाहिए.” अब इस भाषण से आप तै करें कि जा़किर नाईक आतंकी बनने के लिए उकसा रहे हैं या समाज को बुराइयों से पाक करने के लिए मुसलमान को एक प्रेणी बनने की ताकीद कर रहे हैं?
इतना तो साफ़ हो गया कि जा़किर नाईक ना तो आतंकी बनाने की मशीन चलाते हैं,और ना ही उन का टेरेरिज़्म से कोई ताल्लुक़ है. अब सवाल है कि फिर जाॉकिर नाइक राडार पर क्यों?
जवाब आसान है कि जा़किर नाइक की तार्तिक वाक्य से हिंदुओं,में इसलाम तेजी़ से फैल रहा है,
इसलाम के “पीस फुल”शिक्षा को सही ढंग से लोगों तक पहुँचाने वाले जा़किर नाइक को भगवा ताक़तें दर असल कट्टरता हिंदुत्वता और नफ़रत की राजनिति  के  लिए नुक़सानदायक समझ रही हैं.
और आर.एस.एस  अपने  राजनेतिक विंग बी.जे.पी द्वारा मीडिया व जांच एजेंसियों को इसतेमाल करके
जा़किर की आवाज़ को ही नहीँ बढ़ते हुए इसलाम प्रेम को दबाना चाहती है,
N.I.A जैसी NATIONAL INVESTIGATION AGENCY जिसका काम संदिग्धों की छानबीन करना,और देश की सुरक्षा करना है.रिपोर्ट के मुताबिक़ एन.आ.ई जा़किर नाईक के भाषणों की जांच कर रही है,
साक्षी महाराज,योगी आदित्यनाथ, साध्वी प्राची,और इन जैसे नफ़रत फैलाने वाले
नेताओं को जिनका काम कट्टरता व सांप्रदायिकता  फैलाकर देश को खोखला करना है,
N.I.A ने इन संदिग्धों के भाषण की जाँच आज तक नहीं की,मीडिया ने इनको आज तक किसी बाहरी देश का एजेंट घोषित नहीं किया, और देखिये असीमानंद के साथ  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मंच साझा करते हुए फोटो के बारे में हर कोई जानता है,हाफिज़ सईद के साथ वैदिक जी पाकिस्तान जाकर मिलकर आये हैं। असीमानंद और हाफिज़ सईद दोनों भारत सरकार द्वारा न सिर्फ़ घोषित आतंकवादी हैं बल्कि हाफिज़ सईद को मोदी सरकार भी मुंबई हमलों का मास्टर माइंड बताती है।
जांच एजेंसियाँ  वैदिक जी और मोदी जी की भी जांच करने की हिम्मत रखती हैं,या देश की मीडिया इन्हें भी आतंकी कहने का सोच सकती है, नहीँ एैसा नहीँ हो सकता क्योंकि इन साम्प्रदायिक चैनलों को टी.आर.पी बढ़ाने के लिए परदे के पीछे से करोडो़ रुपये सौगा़त में मिलते हैं, सबसे बड़ा आतंक तो इन्हीं मीडियाई फैमिलीज़ ने मचा रक्खा है,
ABP NEWS का जा़किर नाईक पर ताजा़ इल्जा़म है कि वा राम को भगवान नहीं मानते,जा़हिर है एक मुसलमान राम को भगवान क्यों कर मानेगा जिस के धर्म में इंसान भगवान हो ही नहीँ सकता, तो धर्म निरपेक्ष देश में अपने मज़हब की बात करना,धार्मिक उपदेशों का पालन करना,और उन्हें बयान करना अगर आतंकवाद है तो देश के सारे मन्दिर,गुरुदद्वारे,चर्चं,सत्संग व्यास,को आतंकी अड्डे, और सभी धर्म गुरुओं को आतंकवादी बतलाकर
बैन कर देना चाहिए. पर जा़हिर है एैसा हो ही नहीं सकता क्योंकि ना तो कोई धर्म आतंकवाद की शिक्षा देता है,और ना ही कोई सच्चा धर्मगुरू! बस यह तो नफ़रत और कट्टरता की राजनिति है कि  रहबरों को डाकू और रहज़नों को मसीहा बतलाया जा रहा है. असल मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए मीडिया द्वारा मोदी सरकार कोई ना कोई फर्जी बहस छेड़ती आई है.

डाक्टर ज़ाकिर नाईक न सिर्फ भारत बल्कि सम्पूर्ण विश्व के मुसलमानों के दिलों की धड़कन और अमन के दूत हैं,
उनके साथ मसलकी मतभेद अपनी जगह पर है. इस नाज़ुक मौके़ पर जब कि जा़किर नाईक को निशाना बना कर इसलाम और मुसलमानों को कलंकित करने की एक बड़ी साजि़श चल रही है.हम जा़किर नाइक के साथ क़दम से क़दम मिलाकर चलेंगे, ताकि इसलाम जो शांति का,प्यार का,ईसार का  मज़हब है उसे आतंक का मज़हब साबित करने वालों पर विराम लगाया जा सके.