आज दुनिया को वैश्विक ईद की जरूरत है। मौलाना बदीउज्जमां नदवी क़ासमी

आज दुनिया को वैश्विक ईद की जरूरत है। मौलाना बदीउज्जमां नदवी क़ासमी

  ईद का दिन सभी मानव जाति को आमंत्रित करता है कि इस्लाम धर्म शांति और सुरक्षा का गारंटर, निस्वार्थता और करुणा का शिक्षक और भाईचारे और समानता का धर्म है। ईद मुसलमानों को दूसरे लोगों के साथ अच्छा व्यवहार करना सिखाता है और उनके साथ ईद की खुशियों में हिस्सा लेने दें और आज…
गुनाहगारों को अल्लाह के रहमत से उदास नही होना चाहिए : मौलाना बदीउज्जमा नदवी क़ासमी

गुनाहगारों को अल्लाह के रहमत से उदास नही होना चाहिए : मौलाना बदीउज्जमा नदवी क़ासमी

इंसान से बड़े बड़े और बेशुमार गुनाह हुए हों लेकिन अल्लाह की रहमत और मगफिरत से उदास नही होना चाहिए और दरबार में तौबा स्वीकार करने की आज्ञा तब तक खुली रहती है। जब तक नौकर अपनी मृत्यु के समय गरारे करने की स्थिति में नहीं पहुँच जाता, उस समय से पहले जब भी बंदा...
रमजान की ऐतिहासिक स्थिति मौलाना बदीउज्जमा नदवी क़ासमी

रमजान की ऐतिहासिक स्थिति मौलाना बदीउज्जमा नदवी क़ासमी

  इमाम इब्न जरीर तबरी अपने रवायत में कहते हैं: पहले मुसलमान हर महीने में तीन रोज़े रखते थे, फिर रमज़ान में रोज़ा फर्ज हो गया। जब कोई इंसान इफ्तार के वक्त खाना खाये बगैर सो जाता तो फिर अगले दिन इफ्तार तक खाना नही खा सकता था। अंसार में से सुरमा बिन मलिक नाम…
द कश्मीर फाइल्स: हमें क्या करना चाहिए

द कश्मीर फाइल्स: हमें क्या करना चाहिए

  कश्मीरी पंडित के कश्मीर से वापस लौटने पर आधारित फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ इन दिनों सुर्खियों में है और इसे राजनीतिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल करने का एक महत्वपूर्ण साधन माना जा रहा है। फिल्म ने सांप्रदायिक नफरत की एक चिंगारी को प्रज्वलित किया है, देश के बड़े अल्पसंख्यक को जहर दिया है, और…
उत्तरप्रदेश में बेरोज़गारी और तरक़्क़ी पर फ़िर्कापरस्ती जीत गई

उत्तरप्रदेश में बेरोज़गारी और तरक़्क़ी पर फ़िर्कापरस्ती जीत गई

उत्तरप्रदेश असैंबली इंतिख़ाबी नताइज तवक़्क़ो के मुताबिक़ ही आए हैं। मौकापरस्त और सैकूलर स्टस को बी जे पी का मुतबादिल बनने के लिए ना उनमें दिलचपसी थी और ना ही उन में एतिमाद था। पाँच रियास्तों उतर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मिनी पूर के असैंबली इंतिख़ाबात के नताइज के मुताबिक़ बी जे पी पंजाब…
क़यामत का दिन क्यों ज़रूरी है?

क़यामत का दिन क्यों ज़रूरी है?

Sultan Ahmed यदि हम सोचते हैं कि इस वर्तमान जीवन में हम जो देखते हैं उससे परे हमारे कार्यों के लिए कोई भविष्य और जिम्मेदारी नहीं है, तो धोखाधड़ी, बेईमानी और अनैतिक व्यवहार के सभी लाभ जो बिना दण्ड के रह जाते हैं और बहुत से लोग इस दुनिया में बिना सजा के रह जाते…
हज़रत मोहम्मद (स॰अ॰) की जयंती पर…. रहमत-ए-आलम की आमद मानवता और संसार के लिए करूणा का पात्र

हज़रत मोहम्मद (स॰अ॰) की जयंती पर…. रहमत-ए-आलम की आमद मानवता और संसार के लिए करूणा का पात्र

इस्लामिक कलेन्डर में रबि-अव्वल महीने का बड़ा महत्व है। चूँकि इसी पवित्र महीने में इस्लाम धर्म के संस्थापक हज़रत मोहम्मद साहब का जन्म हुआ था । साढ़े चौदह सौ वर्ष पूर्व जब हज़रत मोहम्मद ने पवित्र मक्का शहर में आंखें खोलीं तो दुनिया का नज़ारा ही कुछ और था । पूरा विश्व अंध्कार में डुबा…
अच्छाई और बुराई के गुण..

अच्छाई और बुराई के गुण..

कुरान अपने दिव्य मिशन के साथ एक अच्छे आदमी और बुराई के अपने मिशन के साथ बुरे आदमी का एक रूपक देता है। अच्छा आदमी, आध्यात्मिक जीवन पाने से पहले मरे हुए के समान था।  यह अल्लाह की कृपा थी जिसने उसे आध्यात्मिक जीवन और एक प्रकाश दिया जिसके द्वारा वह चल सकता था और…
भारत में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार कम होंगे तो बात करें अफ़गानों की।

भारत में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार कम होंगे तो बात करें अफ़गानों की।

  एहसास नायाब(शिमोगा, कर्नाटक) जुनैद, नजीब, तबरेज़, अफरोज़ोल, आसिफ और 8 वर्षीय नन्हा अज़ीम, ईनमें से कोई भी अफगान नागरिक नहीं था, न ही उनके माता-पिता अफगानिस्तान के थे, लेकिन वे दुर्भाग्यपूर्ण भारतीय नागरिक हैं। उनके पूर्वज भारतीय नागरिक थे। और हां भारत में हो रहे अत्याचार से मानवता को शर्मसार होना .. इनके अलावा…
15 अगस्‍त को अपना 75वां स्‍वतंत्रता दिवस

15 अगस्‍त को अपना 75वां स्‍वतंत्रता दिवस

[Ubaidullah Ptrkar: जमाने में मिलते हैं आशिक कई, जमाने में मिलते हैं आशिक कई मगर वतन से खूबसूरत कोई सनम नहीं होता नोटों में लिपट कर सोने में सिमटकर नोटों में लिपट कर सोने में सिमटकर मरे हैं कई मगर तिरंगे से खूबसूरत कोई कफ़न नहीं होता भारत रविवार यानी 15 अगस्‍त को अपना 75वां…