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मोदीजी:यूपी उत्तराखंड लाशो का सैलाब जिम्मेदार कौन ??

मोदीजी:यूपी उत्तराखंड लाशो का सैलाब जिम्मेदार कौन ??

 

स्टार न्यूज़ टुडे (संवाददाता यूपी)

राकेश पाण्डेय

उत्तर प्रदेश के दो ज़िलों और उत्तराखंड के रुड़की में ज़हरीली शराब एक बार फिर क़हर बनकर टूटी है जहां अब तक दर्जनों लोग मौत के मुंह में समा चुके हैं और सौ से ज़्यादा विभिन्न अस्पतालों में ज़िंदगी और मौत से संघर्ष कर रहे हैं।
सहारनपुर में ज़हरीली शराब से मरने वालों का आंकड़ा 46 तक पहुंच गया है. सहारनपुर के ज़िलाधिकारी आलोक पांडेय और पुलिस अधीक्षक दिनेश कुमार पी. ने संयुक्त प्रेस वार्ता में इसकी जानकारी दी.
हालांकि अपुष्ट सूत्रों के मुताबिक़ ये आंकड़ा इससे भी कहीं ज़्यादा है. वहीं उत्तराखंड के रुड़की में भी ज़हरीली शराब से अब तक 14 लोगों की मौत हो चुकी है.
सहारनपुर ज़िले के नागल, गागलहेड़ी और देवबंद थाना क्षेत्र के कई गांवों में दर्जनों लोगों की मौत हो गई है और पचास से ज़्यादा लोग शहर के विभिन्न अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं. गंभीर रूप से घायल कई लोगों को मेरठ मेडिकल कॉलेज में भी भर्ती कराया गया है.

कौन है आधा दर्जन से अधिक मौतो का ज़िम्मेदार

राज्य के डीजीपी ओपी सिंह का कहना है कि सहारनपुर में ज़हरीली शराब पड़ोस के उत्तराखंड राज्य से लाई गई थी. उत्तराखंड के रुड़की में भी ज़हरीली शराब पीने से अब तक कई लोग जान गँवा चुके हैं.
इससे पहले, गुरुवार और शुक्रवार को ही कुशीनगर में भी ज़हरीली शराब ने दस से ज़्यादा लोगों की जान ले ली थी. दोनों घटनाओं से हैरत में आई सरकार ने कार्रवाई करते हुए पहले कुछ कर्मचारियों का निलंबन किया और फिर शुक्रवार देर रात लखनऊ में मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक ने सभी ज़िलों के डीएम और एसएसपी के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के ज़रिए अवैध शराब की बिक्री के ख़िलाफ़ सख़्त क़दम उठाने के निर्देश दिए।सहारनपुर में नागल थाना प्रभारी सहित दस पुलिसकर्मी और आबकारी विभाग के तीन इंस्पेक्टर और दो कांस्टेबल निलंबित किए जा चुके हैं. कुशीनगर में भी ज़िला आबकारी अधिकारी समेत आबकारी विभाग के दस कर्मचारियों को निलंबित किया जा चुका है।

हरिद्वार से जुड़े है कारोबार के कनेक्शन

बताया जा रहा है कि सहारनपुर में ज़हरीली शराब पीने के बाद मौत का सिलसिला शुक्रवार सुबह से शुरू हुआ. नागल थाना क्षेत्र के ग्राम उमाही, सलेमपुर और गागलहेड़ी थाना क्षेत्र के गांव शरबतपुर और माली गांव में जहरीली शराब के सेवन के बाद एक के बाद एक लोगों की हालत बिगड़नी शुरू हो गई. शुरुआत में 10 लोगों को ज़िला अस्पताल लाया गया, जहां दो लोगों की मौत हो गई. उसके बाद ये आंकड़ा बढ़ता ही गया। घटना की गंभीरता को देखते हुए सहारनपुर के कमिश्नर सीपी त्रिपाठी समेत सभी आला अधिकारी प्रभावित गांव और अस्पतालों में पहुंचे. सहारनपुर के एसएसपी दिनेश कुमार पी. ने बीबीसी को बताया, “शराब पीकर बीमार होने वाले और मरने वाले लोग उत्तराखंड के हरिद्वार ज़िले में एक तेरहवीं में गए थे और वहां से आने के बाद इन लोगों की तबीयत ख़राब हुई. मौसम ख़राब होने के कारण बीमार होने के बावजूद ये लोग गांव से बाहर नहीं जा पाए जिसकी वजह से कुछ लोगों की मौत हुई. जिन्हें समय से अस्पताल पहुंचाया गया, उनमें से कई लोग बच गए हैं जिनका इलाज हो रहा है.”

‘ज़हरीली शराब’ मामले में पूरा थाना सस्पेंड

सहारनपुर के देवबंद क्षेत्र में दस साल पहले यानी साल 2009 में भी ठीक ऐसी ही एक घटना हुई थी जब ज़हरीली शराब ने 49 लोगों की जान ले ली थी. पिछले दो साल में शराब से होने वाली मौत की ये पांचवीं बड़ी घटना है।
पिछले साल मई में कानपुर के सचेंडी और कानपुर देहात में ज़हरीली शराब पीने से एक दर्जन से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई थी जबकि जनवरी में बाराबंकी में क़रीब एक दर्जन लोग ज़हरीली शराब पीने से मर गए थे. वहीं जुलाई 2017 में आजमगढ़ में अवैध शराब पीने से 25 लोगों की मौत हो गई थी।

कारोबार मे पुलिस की भूमिका संदिग्ध

जानकारों के मुताबिक़ ज़हरीली शराब का पूरे उत्तर प्रदेश में एक बड़ा नेटवर्क काम करता है जो पुलिस और प्रशासन की मदद से अपना कारोबार संचालित करता है सहारनपुर के लोग बताते हैं। “जहरीली शराब बनाने वालों का नेटवर्क पूर्वी उत्तर प्रदेश से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक फैला हुआ है और इसके तार उत्तराखंड से भी जुड़े हैं. ज़हरीली शराब जिस जगह पर बनाई जाती है, उसकी गंध से ही पता चल जाता है, ऐसे में पुलिस और प्रशासन को ख़बर न हो, ये संभव नहीं. सरकार ने जिस तरह से कार्रवाई की है उससे भी पता चलता है कि आबकारी विभाग के लोगों के अलावा इस अवैध कारोबार के फलने-फूलने में पुलिस की भी बड़ी भूमिका होती है.”

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