मानवीय भावनाओं की मिशाल बने पदमाकर सिंह लाला 

मानवीय भावनाओं की मिशाल बने पदमाकर सिंह लाला 
** मानवीय संवेदनाओं की प्रतिमूर्ति युवाओं के प्रेरणास्रोत पदमाकर के सामाजिक सरोकार से जुङे कार्यों को हो रही सरहाना


समस्तीपुर (मोहम्मद जमशेद)समाजसेवा इन दिनों आर्थिक आय का जरिया बन गया है।हर कोई इस क्षेत्र में आ कर कुछ न कुछ अधिक करने की ख्वाहिश रखता है ।इन सबके बीच एक अच्छी खबर लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर रही है।इनकी सामाजिक सरोकार से जुङे कार्यों की लोग सराहना कर।रहे हैं। ऐसी ही एक शख्सियत है पदमाकर सिंह लाला।पेशे से पत्रकार हैं।पर दिली तौर पर सामाजिक सरोकार से जुङे कार्यों के प्रति हमेशा एक कुशल सारथी की भूमिका का निर्वाह करने वाले । आम जनमानस से लेकर खास व्यक्तित्व के बीच हमेशा उपलब्ध रहते हैं।लगभग डेढ़ दशक के लंबे समय से पत्रकारिता में अपनी सशक्त, निर्भीक व बेबाक लेखनी के जरिए समाज में घटित विभिन्न समसामयिक मुद्दों पर मजबूत पकड़ बनाएं रखने का इनका जज़्बा वाकई अनुकरणीय व प्रेरक हैं।जीवन के शुरूआती दिनों में आर्थिक तंगी ,भेदभाव व उपेक्षात्मक गतिविधियों के शिकार होने के बावजूद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।हमेशा लक्ष्य के प्रति संजीदा रहने वाले पदमाकर सिंह लाला इन दिनों एक सामाजिक सरोकार से जुङे कार्यों को लेकर खासे चर्चा में हैं।सोशल मीडियाके पटल पर इनकी सामाजिक गतिविधियां लोगों के लिए प्रेरक सरीखा है।कई सामाजिक गतिविधियों को लेकर खासे चर्चा में आए श्री लाला ने समस्तीपुर जिले के विघापतिनगर प्रखंड के सुदुरवर्ती ग्राम्यांचल इलाके मऊ गांव निवासी हैैं।लगातार रात्रिकालीन क्रिकेट,फुटबॉल मैच खासकर महिला फुटबॉल प्रतियोगिता का आयोजन करवा गांव की मिट्टी की खुशबू की खनक से देश-विदेश तक पहुंचा कर मान बढाया।तो राज्यस्तरीय महिला फुटबॉल शिविर का आयोजन पहली दफे गांवों में आयोजित करवाने  के जरिए महिला सशक्तिकरण की दिशा में नायाब उदाहरण प्रस्तुत किया।इसके अलावा शैक्षणिक गतिविधियों में अपनी भूमिका से समाज को नई दिशा दी।पदमाकर लाला द्वारा इन दिनों समस्तीपुर जिला मुख्यालय  में शैक्षणिक उन्नयन की दिशा में कार्य करने की दिशा में पहला कदम सचदेवा सांइस कोचिंग,काशीपुर का संचालन है।इसी दरम्यान  वे अपनी दिन भर की भागदौड़ वाली जिंदगी से इतर प्रतिदिन शाम को इन दिनों कम से कम एक या दो वास्तविक रूप से गरीब-गुरूबों,बेसहारों,परित्यक्त,मजलूमों आदि की समस्तीपुर शहर में तलाश कर उन्हें शाम/रात का नाश्ता/भोजन मुहैया कराने के जद में जुटे रहते हैं।वह भी बिना कोई सरकारी व ग़ैर सरकारी तंत्र की मदद से। मानवीय संवेदनाओं की प्रतिमूर्ति पदमाकर सिंह लाला कहते हैं कि मानवता की सेवा से बढ़कर कोई भी धर्म नहीं होता।भगवान ने दो हाथ इसलिए दिए हैं कि पहले हाथ से अपनी स्वंय (खुद)की मदद करें।तो दूसरी हाथ हमेशा  दूसरों की मदद के लिए बढाएं। फिलवक्त इन दिनों समस्तीपुर जिला मुख्यालय में इनके द्वारा निजी तौर पर चलाएं जा रहे यह अभियान काफी सुर्खियाँ बटोर रही है। सामाजिक सद्भाव व समरसता की मिशाल व युवा पीढ़ी के लिए संबल प्रदान करने वाला इनका जज्बा सामाजिक सरोकार से जुङे लोगों के लिए प्रेरक सरीखा है।