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रोज़ा हमसे क्या मुतालबा करता है?

रोज़ा हमसे क्या मुतालबा करता है?




 मुफ्ती अफीफुल्ला कासमी
रमजान उल मुबारक में जहां तक इबादत का ताल्लुक है तमाम मुसलमान माशाअल्लाह जानते हैं रोजा रखना फर्ज है करावीह पढ़ना भी जरूरी है और तिलावते कुरान को  इस महीने से खास मुनासीबात है इसलिए , नबी ए करीम सल्लल्लाहू अलेही वसल्लम रमजान के महीने में हजरत जिब्राइल अलैहिस्सलाम के साथ पूरे कुरान का दौर फरमाया करते थे इसलिए जितना ज्यादा से ज्यादा हो सके इस महीने में तिलावत करें और इसके अलावा चलते फिरते उठते बैठते जबान पर अल्लाह का जिक्र करें और तीसरा कलमा पढ़ें,
रोजे के माना हैं  खाने पीने से रुकना, और नफसानी ख्वाहिश से रुकना। रोजे में इन तीनों चीजों से बचना जरूरी है अब हमें यह देखना कि यह तीनों चीजें अपनी जात में हलाल हैं खाना हलाल पीना हलाल और जाइज  तरीके से मियां बीवी का अपनी ख्वाहिश पूरी करना हलाल अब रोजे के दौरान इन हलाल चीजों से तो परहेज कर रहे हैं न खा रहे हैं , न पी रहे हैं लेकिन जो चीजें पहले से हराम थी मसलन झूठ बोलना पहले से आराम है, बदनिगाही करना पहले से हराम था  जो हर हर हाल में हराम थे रोजे में सब चीजें हो रही हैं अब रोजा रखा हुआ है झूठ बोल रहे हैं रोजा रखा हुआ है गीबतें कर रहे हैं रोजा रखा हुआ है गंदी गंदी फिल्में देख रहे हैं रोजा रखा हुआ है बद निगाही कर रहे हैं यह सब काम रोज़े में हो रहे हैं यह कैसा रोजा हुआ रोजे का मकसद अल्लाह तबारक व ताला ने कुरान ए करीम के अंदर इरशाद फरमाया। ऐ लोगों तुम पर रोजे फर्ज किए गए जैसा कि तुम से पहले लोगों पर farz किए गए थे क्यों ताकि तुम तकवे वाले , गुनाहों से बचने वाले बन जाओ । अपने आप को शैतानी असरात से बचाओ।  रोजे का मकसद यही है कि हमारे अंदर तकवा पैदा हो ताकि उसके जरिए हमारे दिल के अंदर अच्छाई की  शमा रोशन हो  और हमें यह रमजानुल मुबारक का महीना प्रैक्टिस के लिए दिया गया है हमें इस महीने में गुनाहों से बचकर बुराइयों से बचकर गुजारना है और फिर हमें इसको और आगे तरक्की देनी है यह के रमजान के बाद भी अगर जिंदगी के किसी मोड़ पर गुनाह का ध्यान गुनाह का ख्याल हमारे दिल के अंदर पैदा हो रहा है तो हमें गुनाह नहीं करना है जैसे रोजे की हालत में हमने प्यास की शिद्दत ने पानी नहीं पिया खाना नहीं खाया अल्लाह के डर से हमने सुबह से लेकर शाम तक रोजे की हालत में भूखे रहकर गुजार दिया इसी तरीके से जिंदगी के किसी मोड़ पर झूठ बोलने का ख्याल दिल में पैदा हो रहा है तो हमें झूठ नहीं बोलना है ,धोखे का ख्याल आ रहा है धोखा नहीं देना है ,किसी किसी की बुराई नहीं करनी किसी की चुगल खोरी नहीं करनी किसी पर किसी तरह का जुर्म नहीं करना यही दर्श यही सबक यही हिदायत हमें रोजा देकर जाता है रमादान मुबारक का महीना अल्लाह की इबादत और इंसान की असल पैदाइश का दरस देकर जाता है इंसान को पैदा करने का मकसद अल्लाह के हुक्म को पूरा करना है नबी के तरीके पर चलना है इंशाल्लाह। इस महीने की एक 1 मिनट एक एक सेकंड बड़ी कीमती हैं इनको हमेशा ए नहीं करना चाहिए बल के गनीमत समझ कर ज्यादा से ज्यादा अल्लाह की इबादत करनी चाहिए तिलावते कुरान करनी चाहिए अल्लाह से दुआ करनी चाहिए अपने लिए दुआ करें अपने रिश्तेदार दोस्त अहबाब के लिऐ और अपने मुल्क के लिए कि अल्लाह ताला हमारे मुल्क में अमन कायम फरमाए और खेर के फैसले फरमाए आमीन।
मोबाइल नंबर 9760387786
मस्जिद उममलकुरा शास्त्री नगर सेक्टर 11 मेरठ।